चंडीगढ़। पीजीआई को साइबर सुरक्षा से लैस अत्याधुनिक डेटा सेंटर जल्द मिलने जा रहा है। यह डेटा सेंटर ट्रिपल सिक्योरिटी से लैस होगा। इसकी दिल्ली स्थित सेंटर से सीधे केंद्र सरकार मॉनिटरिंग करेगी। पीजीआई के अलावा एक अन्य सेंटर मुंबई या अहमदाबाद में बनाया जाएगा। ऐसा कर मरीजों से संबंधित डेटा को कई लेयर की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इतना ही नहीं, पीजीआई के साथ-साथ संगरूर, ऊना और फिरोजपुर के सैटेलाइट सेंटर की भी इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी जरूरत की पूर्ति इस सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इस योजना को शुरू करने के लिए परिवार कल्याण मंत्रालय ने पीजीआई को नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज की मदद लेने की सलाह दी है ताकि इसमें किसी भी तरह की गुंजाइश न बचे। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने एचआईएस-2 के लिए हार्डवेयर और आईटी से संबंधित सेटअप तैयार करने को कहा है जिसमें एनआईसीएसआई डाटा सेंटर स्थापित करेगा। उम्मीद है कि यह काम एक साल के अंदर पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनआईसीएसआई को जिम्मेदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के साथ पिछले स्थायी वित्त समिति की बैठक में पीजीआई में अस्पताल सूचना प्रणाली-2 के बारे में गहन चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया था क्योंकि संस्थान में अभी एचआईएस-2 पुराने सिस्टम से ही चल रहा है। इसे नई योजना के अंतर्गत पूरी तरह बदल दिया जाएगा।
मरीजों का एक-एक डेटा होगा सुरक्षित
पीजीआई में प्रतिदिन 10000 से ज्यादा मरीजों की जांच की जाती है। इस सुविधा के शुरू हो जाने के बाद पेशेंट फ्रेंडली इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित किया जा सकेगा। इसके साथ यह प्रणाली आयुष्मान भारत योजना का भी डाटा सुरक्षित करेगा। वहीं, इसके अंतर्गत न्यू ओपीडी जैसे स्थल या ज्यादा से ज्यादा मरीजों के आवागमन वाले क्षेत्रों में वाई-फाई कनेक्टिविटी, मरीज और डॉक्टरों के बीच संपर्क के लिए मोबाइल एप्लीकेशन, क्यू मैनेजमेंट, ऑनलाइन भुगतान गेटवे, डेटा स्टोरेज, इमरजेंसी डेटा स्टोरेज और इमरजेंसी रिकवरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सुरक्षा प्रोटोकाल होगा तय
पीजीआई में कंप्यूटरीकृत निगरानी समिति के अध्यक्ष प्रो. एसएस पांडव ने बताया कि इसके अंतर्गत महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा, जिसमें सुरक्षा ऑडिट, नेटवर्क संचालन केंद्र और एक सुरक्षा संचालन केंद्र जैसी सुविधाओं की आवश्यकता और नीतियों का प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा ताकि डाटा संबंधी असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।