चंडीगढ़। पीजीआई के हड्डीरोग विभाग की फुट एंड एंकल टीम ने वीरवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित रिसर्च ओलंपिक में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। विभाग के प्रमुख प्रो. एमएस ढिल्लन के मार्गदर्शन में शोध छात्र डॉ. संदीप पटेल और डॉ. सिद्धार्थ शर्मा की ओर से किए गए शोध पर उन्हें कांस्य पदक दिया गया है। उन्होंने 3डी मॉडलिंग का उपयोग कर टैलस हड्डी के गलत तरीके से संचालित और गलत संरेखित पैर के फ्रैक्चर को ठीक करने की नई तकनीक तलाशी है, जो विश्व में अपने तरह की इलाज की पहली तकनीक है। इस शोध की विशिष्टता को पहचानते हुए डॉ. संदीप पटेल, डॉ. सिद्धार्थ शर्मा और प्रो.एमएस ढिल्लन को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया है।
प्रो एमएस ढिल्लन ने बताया कि स्विट्जरलैंड के दावोस में रिसर्च ओलंपिक आयोजित हुआ था। एओ दावोस में स्थित है और आघात व मस्कुलोस्केलेटल विकारों के सर्जिकल उपचार के लिए सर्जनों व अनुसंधान संगठन का एक वैश्विक नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि इस शोध के बल पर पीजीआई के डॉक्टर कंप्यूटर सहायता प्राप्त 3डी मॉडलिंग का उपयोग कर टैलस हड्डी के फ्रैक्चर को ठीक करने में सक्षम हैं। पैर का फ्रैक्चर टैलस हड्डी के कारण होता है, जो टखने की मुख्य हड्डियों में से एक है और जो पूरे शरीर का वजन संभालती है। इसका फ्रैक्चर हाेने पर जानकारी के अभाव में इसे सही तरह से नहीं जोड़ा जाता जो मरीज को दर्द देने के साथ ही उसकी चाल भी बिगाड़ देती है।
महीनेभर में आते हैं चार से पांच मामले
प्रो. एमएस ढिल्लन ने बताया कि टैलस फ्रैक्चर सबसे अधिक खराब तरीके से इलाज किया जाने वाला फ्रैक्चर है। क्योंकि इसे अक्सर गलत तरीके से संरेखित किया जाता है। रेफरल सेंटर होने के कारण पीजीआई में इस फ्रैक्चर के खराब इलाज के कई मामले सामने आते हैं। पहले ऐसे मामलों में फ्रैक्चर प्लास्टर ऑफ पेरिस में बुरी तरह से जुड़े हुए होते थे, अब सर्जरी के बाद भी बुरी तरह से जुड़े हुए फ्रैक्चर वाले केस मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे फ्रैक्चर हड्डी के फ्रैक्चर में 0.5 प्रतिशत से भी कम होते हैं। पीजीआई में इसके खराब इलाज वाले मामले महीने में चार से पांच आ रहे हैं, इसलिए इसका सही इलाज जानना बहुत आवश्यक हो गया है।
आप भी जान लें इस फ्रैक्चर का कारण
टैलस फ्रैक्चर दुर्घटनाओं के कारण होता है। जानकारी के अभाव में इसे अक्सर गलत तरीके से ठीक किया जाता है, जो डॉक्टरों के अनुसार वास्तविक फ्रैक्चर से भी बदतर होता है। प्रो एमएस ढिल्लन ने बताया कि शोध के दौरान सीटी स्कैन में हड्डी का पुनर्निर्माण किया गया, 3 डी प्रिंटआउट लिया गया और खराब पैर के सीटी स्कैन को दर्पण छवि के रूप में लिया गया और उसे अच्छे पैर पर लगाया गया ताकि हमें सटीक विकृति का पता चला। प्रो. एमएस ढिल्लन का कहना है कि ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ है क्योंकि इस फ्रैक्चर को विशेषज्ञों की ओर से सबसे अधिक उपेक्षित किया गया है।