चंडीगढ़। पीजीआई में बेहोशी की दवा से हुई मौत के मामले पर संस्थान अब भी सवालों के घेरे में हैं। इसके दोषियों पर कार्रवाई तो दूर क्लीनिकल रिपोर्ट तक का खुलासा नहीं हो सका। यूटी प्रशासन और पीजीआई जांच रिपोर्ट गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रहा है। इस बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि प्रकरण के बाद भी दुकानों की जांच करने वाली कमेटी लापरवाही बरत रही है। आरटीआई में सवालों के जवाब में पीजीआई प्रशासन ने खुद माना है कि उनकी तीन जांच कमेटियों में से महज एक ही निरीक्षण कर रही है जबकि दो अन्य को दिए गए क्षेत्र में संचालित दुकानों, कैंटीन और अन्य वाणिज्यिक स्थलों पर कमेटी नहीं जा रही। इतना ही नहीं संस्थान मामले से जुड़े सवालों के जवाब देने में भी आनाकानी कर रहा है। वहीं 11 में से महज चार सवालों के ही जवाब दिए।
2021 की कंपनी से क्यों ली दवा
आरटीआई में पूछा गया था कि जब देश में वर्षों पुरानी दवा की कंपनियां अस्तित्व में हैं फिर महज एक वर्ष पहले स्थापित निक्सी लैब से बेहोशी की दवा क्यों ली गई लेकिन पीजीआई प्रशासन ने इसका जवाब नहीं दिया। बता दें कि संस्थान में अगस्त 2022 में जिस बेहोशी की दवा प्रोपोफोल से 5 मरीजों की मौत का मामला सामने आया था, उसमें निक्सी लैब की दवा के इस्तेमाल की बात कही गई थी। संस्थान ने दवा की दुकान के टेंडर के कागजात देने से भी इन्कार कर दिया है। वहीं मौत के प्रकरण में जिस डॉक्टर की शिकायत पर जांच कमेटी गठित की गई थी उसके शिकायती पत्र की कॉपी भी नहीं दी जा रही।
कंपनी से अब भी आपूर्ति जारी
घटना के बाद जिन दो कंपनियों के दवा के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उन दोनों के ही नमूने फेल हो चुके हैं। इसके बावजूद नियॉन कंपनी से संस्थान में दवाओं की आंतरिक आपूर्ति जारी है। जवाब में बताया गया है कि नियॉन कंपनी की प्रोपोफाोल का 4944 वॉयल स्टॉक में है। बता दें कि ड्रग इंस्पेक्टर ने पीजीआई से नियॉन और निक्सी लैब की एक-एक दवा का नमूना जांच के लिए लिया था। दोनों ही कंपनियों के नमूने फेल हो चुके हैं। इसके बावजूद आपूर्ति जारी है।
कोट-
प्रोपोफोल मामले पर पीजीआई प्रशासन अनदेखी का रवैया अपनाए हुए है। मामले से जुड़े जिन 14 सवालों के जवाब मांगे गए थे उनमें से महज चार के जवाब दिए गए हैं। मेरा उद्देश्य पीजीआई में दवा के उपयोग से मरीजों के मौत के मामले की तह तक जाना है क्योंकि लापरवाही से हुई मौत के मामले में दोषियों पर कार्रवाई करने में की जा रही अनदेखी अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आती है।
प्रिंस भंडुला, भाजपा मेडिकल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष