पीजीआई के एडवांस आई डिपार्टमेंट में एवेस्टिन इंजेक्शन का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद हो गया है। इससे उन मरीजों की मुश्किले बढ़ गईं हैं, जिनकी डायबिटीज के कारण रोशनी जाती रहती है। एवेस्टिन की एक डोज 1500 रुपये पर पड़ती है जबकि उसकी जगह इस्तेमाल की जाने वाली दवा ल्यूसेंटिस की कीमत करीब 25 हजार रुपये है। ऐसे में गरीब व मध्य वर्ग के मरीजों के लिए ल्यूसेंटिस लगवाना मुश्किल है।
पीजीआई का कहना है कि जब तक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से कोई निर्देश नहीं आता तब तक इस पर फैसला नहीं लिया जाएगा। सीडीएससीओ से न तो पीजीआई को पत्र भेजा गया है और न स्थानीय ड्रग कंट्रोलर को। जुलाई के महीने में एवेस्टिन का इंजेक्शन लगने से 25 से ज्यादा लोगों की आंखों में दिक्कत आ गई थी। उसके बाद पीजीआई ने एवेस्टिन का इंजेक्शन लगाने पर रोक लगा थी। उस दौरान बताया गया था कि कुछ समय के लिए एवेस्टिन को बंद किया जा रहा है। सीडीएससीओ से निर्देश मिलने के बाद उस पर फिर से विचार किया जाएगा। पीजीआई में डायबिटिक रेटिनापैथी के हजारों मरीज आते हैं।