चंडीगढ़। इन्वेस्टिगेटिव मेडिसिन के इस दौर में क्लिनिकल मेडिसिन को कभी मत भूलिए। एक मरीज को पूरी तरह से बीमारी के रूप में समझना होगा।
आज के दौर में केवल मरीज के मर्ज का इलाज करना ही आज पूर्ण नहीं माना जा सकता, इसलिए हमें यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि हम मरीजों के लिए ही यहां है। उसके अलावा और कोई ऐसी स्थिति यहां होने के लिए कारण नहीं बन सकती, इसलिए हमें उस कारण पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करके काम करना होगा, तभी हम भविष्य में एक सफल चिकित्सक बन पाएंगे। ये बातें एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को पीजीआई के नए शैक्षणिक सत्र के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्यातिथि कहीं।
प्रो. गुलेरिया ने नए प्रवेश करने वाले डॉक्टरों को प्रेरित करते हुए यह समझाने का प्रयास किया कि उन्हें विषय और रोगी केंद्रित दृष्टिकोण को पेशे में उतारकर उसके महत्व को समझना होगा, यह सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने छात्रों को पीजीआई में बतौर छात्र हुए अनुभव से भी रूबरू कराया और कहा कि उनके बेहतर कॅरिअर में एक संस्थान के रूप में पीजीआई का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
230 बेड से 2200 तक के सफर से कराया रूबरू
पीजीआई निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने छात्रों को पीजीआई के 57 वर्षों के सफर से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि 230 बेड से शुरू हुआ यह संस्थान मौजूदा समय में 2200 बेड तक पहुंच चुका है। इस अवसर पर उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान पीजीआई के कोविड-19 अस्पताल के सफल संचालन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीजीआई ने लगभग 2700 पॉजिटिव गंभीर मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है। वहीं इमरजेंसी ट्रॉमा में 7700 मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।
छात्रों को दिलाई गई शपथ
इस दौरान डीन अकादमी प्रो. जीडी पुरी ने 270 से अधिक छात्रों को पिन पहनाकर उन्हें शैक्षणिक समर्पण की शपथ दिलाई। वहीं डीन रिसर्च प्रो. गुरप्रीत सिंह ने छात्रों को पीजीआई चुनने के लिए धन्यवाद दिया और उनके बेहतर भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रोफेसर वाईके चावला, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर एके गुप्ता, उप निदेशक प्रशासन कुमार गौरव धवन और वित्तीय सलाहकार कुमार अभिषेक उपस्थित थे।