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पीजीआई के इस कमरे में होगा बिन दवा इलाज

Thu, 16 Jan 2014 11:57 AM IST
अमर उजाला चंडीगढ़
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पीजीआई की न्यू ओपीडी में दूसरे तल पर स्थित कमरा नंबर 2060 महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर महिलाओं से संबंधित कई गंभीर बीमारियों का इलाज बिना दवा व आपरेशन से संभव हो रहा है।
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इससे हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की कई महिलाओं को सालों से चली आ रही बीमारी से छुटकारा मिला है। कमरे में विशेषज्ञ इलाज के नाम पर सिर्फ कुछ कसरतें और जीवन शैली में बदलाव लाने पर जोर देते हैं।

बस इन नुस्खों पर काम करने से बीमारियां छू मंतर हो जाती हैं। बुधवार को कम्युनिटी मेडिसिन विभाग और आब्सटेट्रिक्स एंड गाइनोकोलॉजी विभाग की ओर से बच्चेदानी बाहर आने की बीमारी के इलाज पर आधारित किताब का विमोचन किया।
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यह किताब हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी भाषा में है। इसमें बताया गया कि बच्चेदानी बाहर आने का इलाज बिना आपरेशन संभव है। बशर्ते उसे शुरुआती दौर में ही विशेषज्ञों को दिखा दिया जाए। विभाग ने यह किताब कई मरीजों पर आजमाए गए नुस्खों के सफल होने के बाद प्रकाशित की है।

यदि ये बीमारी है तो जरूर दिखाएं
1. मेनोपॉज से संबंधित
2. बच्चा न होना
3. पेशाब लीक होना
4. बच्चेदानी बाहर आना
5. महावारी में दर्द होना
6. गर्भवती होने से संबंधित परेशानी व शंकाएं

बच्चादानी बाहर निकलने के लक्षण
1. पेट या नीचे भारीपन होना : यह लक्षण सबसे ज्यादा पाया जाता है। पीड़ितों के मुताबिक बच्चादानी के रास्ते कुछ फूला हुआ सा महसूस होता है।
2. यूरीन संबंधी लक्षण : बार-बार यूरीन आना, खांसी व हंसने के दौरान यूरीन लीक होना या फिर जलन महसूस होना।
3. पेट के विकार : कब्ज होना। टायलेट में रुकावट आना या फिर अचानक आना।
4. सेक्स के दौरान परेशानी : सेक्स के दौरान दर्द होना। उत्तेजना न होना।
5. पेडू और पीठ का दर्द : शरीर के अंग हिल जाने के दौरान पेडू या पीठ में नीचे की तरफ दर्द शुरू हो जाता।

बेस्ट पेपर को किया जा चुका है सम्मानित
प्रोजेक्ट में शामिल शोधकर्ता डा. रुचि शर्मा को पुणे में 2013 में आयोजित कांफ्रेंस में बेस्ट पेपर के अवार्ड से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में डा. रश्मि कश्यप, डा. पूर्णिमा कौशल, डा. वनीता जैन व डा. अमरजीत सिंह शामिल हैं। डा. अमरजीत सिंह अब तक डेढ़ सौ अधिक शोध पत्र लिख चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के थिंक टैंक डा. सिंह ही हैं।
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