लीवर कैंसर तब सबसे खतरनाक हो जाता है जब यह लीवर की मुख्य नस पोर्टल वेन तक फैल जाती है। इस स्थिति में इलाज के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं। मेडिकल भाषा में इसे पोर्टल वेन ट्यूमर थ्रोम्बोसिस (पीवीटीटी) कहा जाता है और 35-50 प्रतिशत मामलों में मरीज इसी एडवांस स्टेज में सामने आते हैं।
स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी से 83.3 प्रतिशत मरीजों में ट्यूमर का अच्छा रिस्पॉन्स देखा गया। मीडियन ओवरऑल सर्वाइवल 13 महीने रही जबकि प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल 10.2 महीने दर्ज की गई। सबसे बड़ी राहत यह रही कि इलाज के दौरान कोई गंभीर (ग्रेड-4) टॉक्सिसिटी या जानलेवा साइड-इफेक्ट सामने नहीं आया। शोधकर्ताओं का कहना है कि पीवीटीटी के साथ लीवर कैंसर अब तक सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है, लेकिन SBRT न सिर्फ ट्यूमर कंट्रोल में असर दिखाती है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता और जीवन अवधि भी बढ़ाती है।
यह अत्यंत सटीक मशीनों की मदद से कम सत्रों में तेज लेकिन नियंत्रित रेडिएशन डोज ट्यूमर पर देती है। रेडिएशन केवल ट्यूमर को निशाना बनाता है और आसपास के स्वस्थ लीवर व अन्य महत्वपूर्ण अंगों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाता है। सर्जरी न कर पाने वाले मरीजों के लिए यह सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।