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नजीर: आयुष्मान भारत के तहत किडनी ट्रांसप्लांट में चंडीगढ़ पीजीआई देश में सबसे आगे, 80 प्रतिशत सफलता दर

Sat, 04 Jan 2025 01:35 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत संस्थान ने देश में अब तक सबसे ज्यादा लाभार्थियों का किडनी प्रत्यारोपण कर नंबर वन पोजीशन प्राप्त की है। सामान्य वर्ग में 5000 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर यह अन्य अस्पतालों के लिए मिसाल कायम कर रहा है।
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चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में लगातार सात वर्षों से दूसरे पायदान पर कब्जा करने वाला पीजीआई कई अन्य मायनों में भी देश के अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए नजीर साबित कर रहा है। अगर किडनी ट्रांसप्लांट की बात की जाए तो इस क्षेत्र में गरीब और जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी को बचाने में संस्थान देश में सबसे आगे है। 
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आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत संस्थान ने देश में अब तक सबसे ज्यादा लाभार्थियों का किडनी प्रत्यारोपण कर नंबर वन पोजीशन प्राप्त की है। इतना ही नहीं सामान्य वर्ग में 5000 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर यह अन्य अस्पतालों के लिए मिसाल कायम कर रहा है। संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर लगभग 80 प्रतिशत तक है।

2023-24 में पीजीआई ने 130 करोड़ रुपये से अधिक पैकेज राशि के साथ 32000 आयुष्मान भारत के मरीजों का इलाज किया। इतने मरीजों का इलाज कर पीजीआई केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक संख्या लोगों को लाभ पहुंचाने वाला सेंटर बन गया है। इसके साथ ही जिन गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट मुश्किल था, आयुष्मान भारत के तहत सुलभ हो गया है। इस योजना के अंतर्गत पीजीआई ने 111 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान को सबसे आगे खड़ा कर रहा है।
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अब तक पांच हजार से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट

पीजीआई में अब तक 5209 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जो इसे भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण में अग्रणी बनाता है। पीजीआई अहमदाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर के बाद दूसरे स्थान पर है। जबकि पीजीआई में अहमदाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर की 400 की तुलना में केवल 50 बेड की क्षमता है। अगर 2023 के आंकड़ों पर गौर करें तो पीजीआई ने 326 किडनी ट्रांसप्लांट किए।

365 के बजाय 90 दिन का इंतजार

पीजीआई ने किडनी ट्रांसप्लांट में रफ्तार पकड़कर इसकी वेटिंग पीरियड भी आधे से ज्यादा कम कर दी है जिससे जीवित प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा अवधि 12 महीने से घटकर केवल तीन महीने रह गई। वहीं, संस्थान एक साथ अग्न्याशय किडनी (एसपीके) ट्रांसप्लांट में देश में अग्रणी है, जो टाइप 1 डायबिटीज मेलिटस के 56 मरीजों को लाभान्वित कर चुका है। किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता दर को बढ़ाने में यूरोलॉजी विभाग भी सहायक साबित हो रहा है। जनवरी 2023 में शुरू किए गए यूरोलॉजी विभाग और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के साथ सहयोग से रीनल ट्रांसप्लांट में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो 2022 में 203 से बढ़कर 2023 में 326 हो गई।
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