एनजीओ के एंबुलेंस ड्राइवरों के साथ एंबुलेंस सेवा के नाम पर गुंडागर्दी करने और मनमाने रेट वसूलने के मामले में पीजीआई ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार को एनजीओ के सभी ड्राइवरों को डायरेक्टर ऑफिस में तलब कर पूछा गया कि क्या उन्हें कभी पीजीआई में आने से रोका गया। अगर रोका गया तो रोकने वाले कौन थे।
ड्राइवरों से पूछा गया कि उन्हें किसी सिक्योरिटी गार्ड ने धमकी दी या फिर रोकने की कोशिश की हो। इसके अलावा भी उनसे कई सवाल पूछे गए। जिस बारे में उन्होंने बयान दर्ज कराए। इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस से फर्जी एंबुलेंस ड्राइवरों के कनेक्शन और पहुंचाई जा रही सूचनाओं के एंगल पर भी जांच शुरू हो गई है। पीजीआई अफसरों ने बताया है कि मामले की जांच रिपोर्ट जल्द तैयार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
पीजीआई में फर्जी एंबुलेंस और गुंडागर्दी के मामले का खुलासा होने के बाद पीजीआई के कुछ कर्मचारियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे बिना मिलीभगत के इतनी धांधली चल रही थी। उसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के संज्ञान में भी मामला आया और उन्होंने कहा कि पीजीआई से मामले की रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके अलावा पुलिस ने भी पीजीआई के कुछ कर्मचारियों के बारे में जानकारी दी गई है कि किस तरह वह फर्जी एंबुलेंस ड्राइवरों को लाशें पेक होने की जानकारी देते थे।
मामले का खुलासा होने के बाद से पीजीआई में एंबुलेंस का आवागमन भी कम हो गया है। बताया जा रहा है कि जिन एंबुलेंस को परमिशन मिली थी, वह नाम मात्र के लिए पीजीआई आ रही हैं। पुलिस ने मामले में 12 फर्जी एंबुलेंस जब्त की हैं।