चंडीगढ़ पीजीआई एडवांस आई सेंटर ने वायरोलॉजी विभाग के सहयोग से आई फ्लू वायरस के एक नए स्ट्रेन एंटरोवायरस कंजक्टिवाइटिस की पहचान की है। यह दूषित पानी से फैलता है और पहले से फैलने वाले एडेनोवायरस की तुलना में हल्के लक्षण वाला है। पिछले दिनों आई फ्लू के मामलों में तेजी से हुई वृद्धि के बाद आई सेंटर ने वायरोलॉजी विभाग के साथ पैथालॉजिकल साक्ष्य के आधार पर कंजक्टिवाइटिस के इस नए स्ट्रेन को खोजने में सफलता प्राप्त की है।
तीन-चार दिन तक रहता है असर
एडवांस आई सेंटर के प्रो. अमित गुप्ता ने बताया कि एडेनोवायरस गंभीर माना जाता है। इस वायरस के संपर्क में आने के 24 घंटे के भीतर संक्रमण फैलता है। यह आमतौर पर एक आंख को संक्रमित करने से शुरू होता है, इसके बाद दूसरी आंख को संक्रमित करता है जबकि नए स्ट्रेन वाला एंटरोवायरस भी कई बीमारियों का कारण बन सकता है, लेकिन अधिकतर मामले आई फ्लू तक ही सीमित हैं। यह वायरस एडेनोवायरस की तुलना में हल्का है और इसकी अवधि कम है। आमतौर पर 10-14 दिनों के बजाय यह वायरस 3-4 दिनों तक रहता है। प्रो. अमित गुप्ता ने बताया कि इस वायरस से प्रभावित मरीजों में ज्यादा संख्या में युवा और बच्चे शामिल हैं।
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इसका रखें ध्यान
वायरस विभिन्न सतहों, जैसे दरवाजे के हैंडल और संक्रमित व्यक्ति की ओर से उपयोग किए गए तकिए के संपर्क से भी फैल सकता है। छोटी बीमारियों के इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने से परहेज करें। क्योंकि वहां संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। प्रो. अमित गुप्ता ने कहा कि संक्रमण का इलाज 4-5 दिनों के भीतर किया जा सकता है। ठंडे पानी से भीगे हुए कपड़े से आंखों को साफ करने और आई ड्रॉप का उपयोग करने से जलन को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बिना डॉक्टर के सलाह के आई ड्रॉप का उपयोग न करने की सलाह दी।
पीजीआई में विशेष काउंटर
एडवांस आई सेंटर के प्रमुख प्रो. एसएस पांडव ने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए सेंटर के प्रवेश द्वार पर ही लाल आंख के रोगियों के लिए एक अलग काउंटर बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अन्य मरीजों को इस संक्रमण से सुरक्षित करना है। प्रो. पांडव का कहना है कि मौजूदा समय में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। संक्रमित बच्चों को स्कूल भेजने की गलती न करें।