पीजीआई ने पहला लंग्स ट्रांसप्लांट करने में कामयाबी हासिल कर ली है। किसी सरकारी अस्पताल में लंग्स ट्रांसप्लांट करने में पीजीआई देश का पहला हास्पिटल बन गया है। अभी तक देश के किसी भी सरकारी हास्पिटल में लंग्स ट्रांसप्लांट नहीं हुआ है। यहां तक एम्स दिल्ली भी इसको अंजाम नहीं दे पाया।
पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम ने बताया कि मोगा का 22 साल का युवक गंभीर हालत में दस जुलाई को पीजीआई आया। उसे ब्रेड डेड घोषित करने के बाद उसकी किडनी, कोर्निया, लंग्स और लिवर निकाला गया। उसके बाद किडनी, लिवर और लंग्स को ट्रांसप्लांट किया गया।
युवक का लंग्स 35 साल एक महिला में लगाया गया है। महिला पंजाब की संगरूर की रहने वाली है। उसका फेफड़ा सिर्फ पांच प्रतिशत काम कर रहा था। एक महीने से वह आक्सीजन पर थी। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज ठीक है। दस दिन तक उसे आईसीयू में रखा जाएगा।
10 से ज्यादा डाक्टरों की टीम जुटी, पीजीआई चार साल से कर रहा था तैयारी
पीजीआई
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लंग्स ट्रांसप्लांट की प्रकिया रात एक बजे शुरू की गई। आपरेशन मंगलवार दोपहर दो बजे तक जारी रहा। इस ट्रांसप्लांट को लेकर पीजीआई काफी दिनों से तैयारी कर रहा था। साल 2013 में पीजीआई को ट्रांसप्लांट करने की क्लीयरेंस मिली। लेकिन सही डोनर नहीं मिलने से बार-बार लंग्स ट्रांसप्लांट टल रहा था।
लंग्स के अलावा किडनी और लिवर को भी ट्रांसप्लांट किया जाएगा। मोगा के युवक ने चार को नई जिंदगी दी बल्कि दो को रोशनी भी दी है। करीब डेढ़ महीने पहले पीजीआई को लंग्स मिला था, लेकिन डाक्टरों के न होने के कारण लंग्स को मुंबई को भिजवा दिया गया था। उस दौरान पीजीआई लंग्स ट्रांसप्लांट में चूक गया था।
पीजीआई ने किडनी, लिवर, पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट में महारत हासिल कर चुका है। चार हार्ट ट्रांसप्लांट हुए हैं। इनमें से दो की मौत हो चुकी है, जबकि दो जीवित हैं। लंग्स ट्रांसप्लांट सक्सेसफुल होने के बाद उन मरीजों के जीने की एक राह मिल जाएंगी, जिनके किसी कारण वश फेफड़े खराब हो जाते थे।