चंडीगढ़। पीजीआई में बीते 45 वर्षों में 4238 मरीजों में किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया गया। खास बात यह है कि कोरोना काल में भी पीजीआई ने किडनी प्रत्यारोपण का सिलसिला जारी रखा और 101 मरीजों में किडनी का प्रत्यारोपण कर उनकी जान बचाई। हालांकि चिंता की बात यह है कि मौजूदा समय में केवल पीजीआई में ही ढाई हजार से ज्यादा किडनी के मरीज प्रत्यारोपण के इंतजार में प्रतीक्षारत हैं। यह जानकारी पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एचएस कोहली ने विश्व किडनी दिवस की पूर्व संध्या पर दी।
डॉ. कोहली ने बताया कि कोरोना काल में पीजीआई में अप्रैल 2020 से 9 मार्च 2021 तक कुल 101 किडनी के मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण किया जा चुका है। इनमें से 22 किडनी ब्रेन डेड से और 79 जीवित अंगदाताओं में से लेकर प्रत्यारोपित की गई है। हालांकि अभी 2500 से ज्यादा किडनी के मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।
बता दें कि पीजीआई में 1973 में जीवित अंग दाता से किडनी लेकर मरीज में प्रत्यारोपित करने की शुरुआत की गई थी जबकि 1996 में ब्रेन डेड से मिली किडनी को प्रत्यारोपित करना शुरू किया गया। इसके तहत अभी तक 435 ब्रेन डेड से मिली किडनी और 3799 जीवित अंगदाताओं से मिली किडनी मरीजों में प्रत्यारोपित की जा चुकी है। वहीं, चार किडनी अन्य शहरों के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी दी जा चुकी है।
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पीजीआई ने किडनी पेयर डोनेशन वेबसाइट की शुरू
विश्व किडनी दिवस की पूर्व संध्या पर पीजीआई में किडनी पेयर डोनेशन वेबसाइट www.indiakpd.org शुरू किया गया। डॉ. एचएस कोहली ने बताया कि यह वेबसाइट किडनी के मरीजों के साथ ही दानी व्यक्ति और अस्पताल के बीच में पुल का कार्य करेगी क्योंकि कई बार मरीज के ग्रुप की किडनी की तलाश में परिजनों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में या वेबसाइट काफी मददगार साबित होगी। उसके माध्यम से प्रत्यारोपण केंद्र ऐसे दानदाता और प्राप्तकर्ता को मिलाने का कार्य करेगा। इस वेबसाइट पर चंडीगढ़ के बाहर के केंद्र भी पंजीकरण कर सकते हैं। पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम व डीडीए कुमार गौरव धवन ने नेफ्रोलॉजी की टीम को बधाई दी। इस अवसर पर किडनी प्रत्यारोपण के प्रमुख प्रोफेसर आशीष शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को पीजीआई में पहली बार तीन मरीजों की लाइव स्वैप सर्जरी की जाएगी।
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दो बार किडनी प्रत्यारोपण के बाद भी फिट
इस अवसर पर उपस्थित जालंधर की डॉक्टर सुरेखा ने बताया कि उनका दो बार किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है। वह डॉक्टर के दिशा निर्देशों का पालन कर एक सामान्य जीवन जी रही हैं। उन्होंने बताया कि 1996 में किडनी फेल हुई तो उनकी मां ने अपनी किडनी देकर मेरी जान बचाई थी। दोबारा 2011 में दूसरी किडनी भी फेल हो गई लेकिन तब कोई दानदाता नहीं मिला। फिर 2014 में ब्रेन डेड से मिली किडनी प्रत्यारोपित की गई। अब सुरेखा की उम्र 68 साल हो चुकी हैं और पूरी तरह ठीक हैं।
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किडनी रखनी है सुरक्षित तो यह करें
- दर्द निवारक दवाएं कम से कम व बिना डॉक्टरी सलाह के न खाएं
- सभी वयस्क साल में दो बार बीपी और शुगर की जांच करवाएं
- 40 वर्ष से ऊपर साल में 6 बार बीपी व शुगर लेवल की जांच करवाएं
- सभी वयस्क बीपी 120/80 पर कंट्रोल करें चाहे बिना दवाओं या फिर दवाओं के साथ
- नशे से बचें, नियंत्रित व स्वस्थ आहार लें
- पर्याप्त नींद लें, तरल पदार्थों का सेवन करें
- ज्यादा नमक व मीठा न खायें
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ये लक्षण हैं खतरनाक
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कम पेशाब आना
पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन
थकान
किडनी की कार्यक्षमता में कमी आने के कारण शरीर में एसिड लोड का बढ़ना
रक्त में पोटेशियम की अधिक मात्रा हो जाना
फेफड़ों में पानी भर जाना
सांस फूलना