‘सामान काम सामान वेतन’ की मांग के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे पीजीआई के कांट्रैक्ट लेबर को बड़ी राहत मिल सकती है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सेंट्रल एडवाइजरी कांट्रैक्ट लेबर बोर्ड ने वीरवार को दिए फैसले में पीजीआई में वर्षों से चल रही ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की सिफारिश की है।
बोर्ड जल्द ही अपना एतिहासिक फैसला मंत्रालय को भेज देगा। यदि सिफारिशें लागू होती हैं तो पीजीआई में काम कर रहे करीब दो हजार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। उन्हें वे सब सुविधाएं मिलेंगी, जो पक्के कर्मचारियों को दी जा रही हैं।
इससे उन कर्मचारियों की उम्मीद भी जाग गई है, जो पिछले दस साल से एक ही वेतन पर पीजीआई में काम कर रहे हैं। सूचना है कि मंत्रालय को अब इस बारे में नोटिफिकेशन जारी करना है। उसके बाद ही संस्थान में सिफारिशें लागू होंगी।
क्या है कांट्रैक्ट लेबर का मामला
पीजीआई में ठेके पर कुल 11 कैटेगिरी काम करती हैं। इनमें से मेडिकल रिकार्ड टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टोर कीपर्स, डाक रूम असिस्टेंट, क्लर्क व स्टेनोग्राफर को पक्के कर्मचारियों की तरह सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि कांट्रैक्ट लेबर का शोषण किया जा रहा है। वे भी पक्के कर्मचारियों की तरह काम करते हैं।
एक ही सैलरी पर कोई दस साल से काम कर रहा है तो कोई पांच साल से। इन्हें न तो डीए मिलता है और न ही समय पर बोनस। संडे को छुट्टी होने के कारण इनकी सैलरी भी कटी है। चार संडे होने के कारण इन कर्मचारियों को मात्र 26 दिन की सैलरी दी जाती।
इनमें सेनेटरी अटैंडेंट, हॉस्पिटल अटैंडेंट, सिक्योरिटी गार्ड और बीइयर्स में काम करने वाले शामिल हैं। पीजीआई इंप्लायज यूनियन ने पहले इस मुद्दे को संस्थान के प्रशासन के सामने रखा, लेकिन उन्होंने मांगें मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद 31 मई, 2007 को यूनियन सेंट्रल एडवाइजरी कांट्रैक्ट लेबर बोर्ड के पास पहुंची।
कोट
हम जो बातें कई वर्षों से कह रहे थे, अब उसे श्रम मंत्रालय ने भी मान लिया है। संस्थान को अब बिना कुछ सोचे अपने कर्मचारियों के भले के बारे में कदम उठाना चाहिए।
- अश्विनी मुंजाल, चेयरमैन पीजीआई इंप्लायज यूनियन
महंगाई के इस दौर में जितने रुपये हमें दिए जा रहे हैं, उतने में गुजारा करना काफी मुश्किल है। पीजीआई के कई कर्मचारी 10-15 साल से संस्थान के लिए काम कर रहे हैं। अब पीजीआई को अपने कांट्रैक्ट कर्मचारियों को राहत दे देनी चाहिए।
- संजीव कुमार, प्रधान कांट्रैक्ट लेबर यूनियन पीजीआई