पीजीआई चंडीगढ़ के लिए इस बार का बजट अच्छा रहा, क्योंकि पिछले साल की तुलना में 226 करोड़ ज्यादा रुपये दिए गए हैं। हालांकि पीजीआई ने इस बार सरकार से 2200 करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन केंद्र सरकार ने 1840 करोड़ दिए हैं। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि बजट के स्तर पर उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। सरकार अतिरिक्त बजट देकर कमियों को दूर कर देती है। गौरतलब है कि 2020-21 में पीजीआई ने सरकार से 2050 करोड़ मांगे थे, जिसमें से 1613.82 करोड़ दिए गए थे।
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शीर्ष पर होने के कारण पीजीआई में शोध के साथ ही मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का प्रयास होता है। इसे ध्यान में रखते हुए मरीजों की संख्या और सुविधाओं के विस्तारीकरण का आकलन कर प्रस्तावित बजट तैयार किया जाता है। संस्थान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार बजट भी स्वीकृत करता है।
पीजीआई की योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
इस बार के स्वीकृत बजट में से 30 से 40 फीसदी फंड तीन बड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। पीजीआई के डीडीए कुमार गौरव ने बताया कि पीजीआई में निर्माणाधीन एडवांस न्यूरो साइंस ब्लॉक, हिमाचल के ऊना और पंजाब के फिरोजपुर में बन रहे पीजीआई सेटेलाइट सेंटर और पीजीआई परिसर में कर्मचारियों के बन रहे आवास की योजना शामिल है।
पीजीआई ने इस बार 2200 करोड़ का प्रस्तावित बजट भेजा था। उसमें से 1840 करोड़ स्वीकृत होना पीजीआई के लिए राहत भरा है। बजट के स्तर पर पीजीआई को कभी भी कमी की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि मानसून और शीत सत्र में अतिरिक्त बजट प्रदान कर दिया जाता है। -कुमार अभय, वित्तीय सलाहकार, पीजीआई