कोरोना महामारी में देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ बड़े अस्पतालों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। ऐसी स्थिति में पीजीआई चंडीगढ़ अहम भूमिका निभा रहा है। चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और यूपी तक के कोरोना के गंभीर मरीजों का पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में सफल इलाज किया जा रहा है।
देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में शामिल पीजीआई चिकित्सा संस्थान के रूप में अपनी अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों को जारी रखते हुए कैसे कोरोना की जंग में अहम भूमिका निभा रहा है, इससे जुड़े तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए अमर उजाला ने पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. जगतराम से बात की। इस दौरान उन्होंने पीजीआई की मौजूदा व्यवस्था के साथ भावी रणनीति और कार्य योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सवाल : कोरोना महामारी के दौर में पीजीआई में इलाज की बेहतर व्यवस्था बहाल किए जाने की कार्य योजना कैसे तैयार की?
जवाब : देश में जब कोरोना के मरीज मिलने शुरू हो गए तब सरकार ने देशभर के बड़े अस्पतालों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। उसी क्रम में चंडीगढ़ प्रशासन से भी फरवरी में एक बैकअप हॉस्पिटल तैयार करने को कहा। चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले निर्देश के बाद पीजीआई को एक बैकअप हॉस्पिटल के रूप में तैयार करने का निर्णय लिया। यह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण लक्ष्य था।
पीजीआई ने उसे स्वीकार करते हुए नेहरू एक्सटेंशन की नई बिल्डिंग को बैकअप हॉस्पिटल के रूप में तैयार करने का निर्णय लिया, जिसे कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल का नाम देकर वहां कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था की। मौजूदा समय में 200 बेड वाले कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल में 185 ऑक्सीजन बेड और 15 आईसीयू वाले बेड की व्यवस्था है। इस व्यवस्था को बहाल करने में हमारे मैनेजमेंट के विशेषज्ञों के साथ ही डॉक्टरों की टीम द्वारा तैयार की गई कार्य योजना का अहम रोल है।
सवाल : पीजीआई ने कोरोना से अपने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
जवाब : मरीजों के इलाज के साथ डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम एक अहम चुनौती थी। अगर इसकी अनदेखी की जाती तो देश के अन्य अस्पतालों की तरह पीजीआई में भी सैकड़ों डाक्टर और स्टाफ कोरोना की चपेट में आ गए होते लेकिन यह हमारे लिए खुशी की बात है कि सैकड़ों पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने के बावजूद पीजीआई में महज पांच से सात स्टाफ ही संक्रमित हुआ।
संक्रमण से बचाव के लिए पीजीआई के सभी प्रवेश द्वार पर प्रॉपर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था है। वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को मास्क देने के साथ थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है। वहीं, इमरजेंसी में हाई रिस्क पेशेंट को भर्ती करने के साथ ही उनका कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। वहां अलग से ट्रायल एरिया भी बनाया गया है। जहां प्रोटोकॉल के अनुसार, मरीजों का इलाज लगातार जारी रखा जा रहा है।
सवाल : कोरोना महामारी में अगर आगे आपातकाल जैसी स्थिति हुई तो पीजीआई कितना तैयार है?
जवाब : स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीजीआई को कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए रिजर्व किया गया है। जहां तक आपातकाल से निपटने की स्थिति की बात है तो उसके लिए 200 बेड की व्यवस्था है। इसके साथ ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भी बैच वाइज ड्यूटी लगाई गई है, जिससे अचानक से ज्यादा स्टाफ और डॉक्टर की जरूरत पड़ने पर व्यवस्था को मैनेज किया जा सके। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ में तनाव प्रबंधन के लिए भी उनकी ड्यूटी रोटेशन के अनुसार इमरजेंसी से जनरल वार्ड तक लगाई जा रही है ताकि उन पर काम का दबाव न बढ़े।
सवाल : पीजीआई में प्लाज्मा थैरेपी से एक मरीज को ठीक करने की उपलब्धि हासिल करने के बाद एमडब्लू वैक्सीन के ट्रायल की क्या प्रगति है?
जवाब : पीजीआई में प्लाजमा थैरेपी से कोरोना के एक मरीज का सफल इलाज किया जा चुका है। दो और मरीजों पर ट्रायल जारी है। उम्मीद है जल्दी ही वह दोनों भी ठीक हो जाएंगे। जहां तक एमडब्ल्यू वैक्सीन के ट्रायल की प्रगति रिपोर्ट की बात है तो उसकी रफ्तार भी काफी तेज है लेकिन इससे जुड़े परिणाम गोपनीय होने के कारण उसे साझा नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कुछ ही महीनों में इसके ट्रायल की फाइनल रिपोर्ट सामने आ जाएगी। इसके बाद देश में कोरोना जैसी गंभीर बीमारी का इलाज संभव हो पाएगा।
सवाल : एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार तीसरे साल भी देशभर में दूसरा स्थान बरकरार रखने के बाद और बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए आगे की कार्य योजना क्या है ?
जवाब : यह पीजीआई के लिए गौरव का क्षण है कि उसे लगातार दूसरे साल भी एनआईआरएफ रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। जहां तक इसमें और बेहतर परिणाम प्राप्त करने की बात है तो उसके लिए संस्थान लगातार प्रयासरत है। कोविड-19 से इस बार स्थिति थोड़ी अलग है लेकिन उसके बावजूद तमाम अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए पीजीआई ने अपने मरीजों को बेहतर इलाज देने का काम जारी रखा है। इसके साथ ही चिकित्सा संस्थान की अन्य गतिविधियों पर भी पूरा फोकस किया जा रहा है, जिससे संस्थान के परिणाम में कहीं कोई कमी ना आने पाए।
सवाल : कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में कोरोना के इलाज के साथ ही एक रिसर्च इंस्टीट्यूट होने के नाते पीजीआई ने अपने इस सत्र की गतिविधियों को पूरा करने की क्या खास तैयारी की है?
जवाब : मरीजों का इलाज करने के साथ ही एक चिकित्सा संस्थान के रूप में पीजीआई अपने इस बार के सत्र को लेकर भी बेहद सजग है। एमडी, एमएस, डीएम और अन्य परीक्षाएं लगातार सुचारु रूप से चल रही हैं। हमारी यही कोशिश है कि संस्थागत गतिविधियों में कहीं कोई रुकावट न आने पाए।
इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन के साथ वार्ता कर नेशनल एग्जामिनेशन की तिथियों पर सहयोग की मांग की जा चुकी है, जिससे अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इन परीक्षाओं को पूरा कराना इसलिए भी बेहद जरूरी है क्योंकि पिछली बैच का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो जाएगा। सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन इसके महत्व को समझते हुए पीजीआई की हर संभव मदद कर रहा है।