समाचार पत्रों से बेहोशी की दवा (प्रोपोफोल) से मरीजों की मौत के मामले का संज्ञान लेते हुए पीजीआई प्रशासन ने इमरजेंसी स्थित केमिस्ट गुप्ता मेडिकोज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दुकान संचालक को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। साथ ही पूछा है कि दुकान संचालक बताए कि उस पर कार्रवाई क्यों न की जाए। पीजीआई खुद स्पष्ट नहीं कर रहा कि मरीजों की मौत हुई है या नहीं। अधिकारी भी मामले पर कुछ चुप्पी साधे हुए हैं।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार, इमरजेंसी स्थित गुप्ता मेडिकोज से मरीजों और उनके परिजनों द्वारा प्रोपोफोल आईपी 10 मिलीग्राम दवा खरीदने की जानकारी मिली है। यह भी मामला संज्ञान में आया है कि उस दवा से मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में अगर लाइसेंस डीड के नियमों और शर्तों पर गौर किया जाए तो दुकान पर गुणवत्ता वाले उत्पादों और दवाओं की बिक्री सुनिश्चित करना अनिवार्य है। ऐसे में अगर वहां कोई भी नकली सामान बेचा गया है तो वह शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अंतर्गत लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है क्योंकि वहां उपलब्ध उत्पाद सरकार के नियमानुसार और कानून के अनुरूप होने चाहिए।
मामले ने पकड़ा तूल तो हरकत में आया प्रशासन
गौरतलब है कि पीजीआई में एनेस्थीसिया के इंजेक्शन प्रोपोफोल लगाने से सर्जरी के बाद कुछ मरीजों की मौत का मामला सामने आया था। इस पर पीजीआई प्रशासन का कहना था कि मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे संज्ञान में लेते हुए पीजीआई प्रशासन ने इमरजेंसी की दवा की दुकान से खरीदे गए इंजेक्शन की गुणवत्ता जांच के लिए यूटी प्रशासन को जानकारी दी थी। इस पर कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर ने दुकान पर उपलब्ध संबंधित इंजेक्शन के सारे स्टॉक दो दिन पहले ही जब्त कर लिया था। वहीं इंजेक्शन का नमूना जांच के लिए कोलकाता लैब भेजा गया है। चार दिन बाद पीजीआई प्रशासन को दवा की दुकान को नोटिस भेजने की याद आई, जिसके बाद गुरुवार देर शाम दुकान संचालक को नोटिस जारी किया गया।
आखिर पीजीआई में क्यों बंद है बेहोशी की दवा की आपूर्ति
पीजीआई के जीवन रक्षक दवाओं की सूची में बेहोशी की दवा प्रोपोफोल भी शामिल है। मानक के अनुसार, पीजीआई प्रशासन को सर्जरी वाले मरीजों को इसकी आपूर्ति अस्पताल के अंदर से ही सुनिश्चित करानी चाहिए लेकिन न्यूरो सर्जरी के मरीजों से यह दवा बाहर से खरीद कर मंगाई गई थी। इसके प्रयोग से मरीजों की जान जाने तक की बात सामने आई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि इस पूरी घटना के लिए पीजीआई प्रशासन ही जिम्मेदार है। अगर मानक के अनुसार वह बेहोशी की दवा की आपूर्ति करता तो फिर मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ती, न ही नकली दवा के प्रयोग से किसी की जान जाने की नौबत आती।
सुलगते सवाल
1. आखिर पीजीआई प्रोपोफोल के इस्तेमाल से गंभीर हालत में पहुंचे या मृत मरीजों की बात क्यों छुपा रहा है
2. चार दिन बीतने के बाद मामले की जांच कहां पहुंची इसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही
3. कोलकाता भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट कब तक आएगी, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं है
4. लगातार अखबारों में मौत के मामले प्रकाशित हो रहे हैं, प्रशासन इस मामले में क्या कर रहा है