पीजीआई में लापरवाही से एक मरीज की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि उनके मरीज को पटियाला के राजिंद्रा हास्पिटल से पीजीआई रेफर किया गया था।
पीजीआई की इमरजेंसी में रात भर रखने के बाद डाक्टरों ने उनसे कहा कि उनका मरीज ठीक है। अब उसे पीजीआई की ओपीडी में दिखाएं। ओपीडी में डाक्टरों को दिखाया।
वहां पर तुरंत इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी में दाखिल होते ही मरीज ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि जब उनके मरीज की हालत गंभीर थी तो उसे इमरजेंसी से क्यों निकाला गया? परिजनों ने इस मामले की शिकायत पुलिस, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व पीजीआई के डायरेक्टर से की।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने डीडीआर दर्जकर परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पीजीआई की ओर से एक पैनल गठित कर मरीज का पोस्टमार्टम किया गया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने पर ही पुलिस व संस्थान की ओर से कार्रवाई होगी।
पटियाला के मनोज कुमार सिंगला के लीवर में दिक्कत थी। उनका इलाज पटियाला के राजिंद्रा हास्पिटल में चल रहा था। 25 जनवरी को उसकी हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई के लिए रेफर कर दिया।
शाम साढ़े छह बजे पीजीआई की इमरजेंसी में उसे दाखिल कर दिया। 26 जनवरी सुबह 11 बजे परिजनों को बताया गया कि उनका मरीज ठीक है। उसे ओपीडी में दिखा दें। 27 को वे ओपीडी पहुंचे और डाक्टर अजय डुसेजा को दिखाया। डा. डुसेजा ने देखते ही उसे इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया।
इमरजेंसी के वार्ड में पहुंचते ही मनोज कुमार सिंगला को उल्टी होने लगी। उनके पेट में पानी भर गया था। आक्सीजन लगाई गई, लेकिन उसने दम तोड़ दिया।
मनोज की मौत सोमवार दोपहर करीब दो बजे हुई थी। उसके बाद परिजनों ने इस मामले की शिकायत पुलिस को दी और मरीज का पोस्टमार्टम कराने की बात भी कही।
वे सोमवार दोपहर से न्याय के लिए भटकते रहे। पोस्टमार्टम के लिए उन्होंने पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट व डायरेक्टर से गुहार लगाई। मंगलवार शाम चार बजे पीजीआई की ओर से चार डाक्टरों का एक पैनल गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया।
इमरजेंसी का इलाज नहीं
सूत्रों का दावा है कि ऐसे गंभीर मरीजों के साथ पहले भी लापरवाही सामने आ चुकी है। इमरजेंसी में मरीजों के मुकाबले बेडों की संख्या काफी कम है। अक्सर ऐसे मरीजों को यहां से छुट्टी देने की बात होती रहती है।
इस मामले में भी ऐसा ही हुआ था। इमरजेंसी में बेड नहीं थे, इसलिए मरीज को दाखिल करने के बजाए उसे ओपीडी भेज दिया गया। मरीज का लीवर पूरी तरह से डैमेज हो चुका था। उसे इमरजेंसी इलाज की सख्त जरूरत थी, लेकिन उसे फिर भी ओपीडी भेज दिया गया।