पाकिस्तान में पिछले 15 वर्ष से रह रही भारतीय मूल की लड़की गीता के एडवोकेट मोमिन मल्लिक गीता से मिलकर बुधवार को वापस जालंधर आ गए। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि गीता को भारत लाने के लिए वह वीरवार को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में दस्तक देंगे।
वह हाईकोर्ट को बताएंगे की मूक बधिर लड़की गीता पिछले 15 वर्ष से पाकिस्तान रह रही है। उसे भारत वापस लाने का प्रयास किया जाए। वह पाकिस्तान से गीता के सभी रिकार्ड लेकर आए हैं। अब हाईकोर्ट के फैसले पर बात टिकी है कि गीता को पाकिस्तान से भारत लाया जाएगा या नहीं।
जालंधर में मीडिया से वार्ता के दौरान मोमिन मल्लिक ने कहा कि पाकिस्तान कोर्ट में उन्होंने गीता से मुलाकात की। गीता मूक बधिर है उन्होंने इशारों में बात करते हुए गीता को विश्वास दिलवाया की वह उसे भारत वापस जरूर लेकर जाएंगे।
रोहतक की संपा आर्या मिली थी गीता से
फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ की रील लाइफ में पाकिस्तानी मूक-बधिर ‘मुन्नी’ को तो अपनों का प्यार मिल गया। लेकिन रीयल लाइफ में हिंदुस्तान की गीता डेढ़ दशक से पाकिस्तान में अपनों का इंतजार कर रही है। फिल्म रिलीज हुई तो गीता के बारे में पता चला, लोगों में भावनाएं भी उमड़ पड़ीं।
अब मीडिया में मामला आने के बाद गीता की वतन वापसी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। रोहतक की ‘संपा आर्या’ भी तीन साल से गीता के परिवार को ‘राजस्थान’ में ढूंढ रही हैं। अब उन्होंने गीता को खुद गोद लेने की इच्छा जाहिर की है।
2012 में कराची में हुई थी मुलाकात
दरअसल, श्रीनगर निवासी संपा आर्या की वर्ष 2012 में गीता से कराची के एक अनाथ आश्रम में मुलाकात हुई थी। तब वह पाकिस्तान के लोगों का धन्यवाद देने के लिए गई हुई थी। इन लोगों ने सऊदी अरब में फंसे उनके पति को वतन वापस लाने में काफी मदद की थी। जब वह गीता से मिली तो उसकी उम्र करीब 22 साल थी।
गीता नौ साल की उम्र में ही अनजाने में पाकिस्तान का बार्डर लांघकर वहां पहुंच गई थी। संपा ने बताया कि मूक-बधिर होने के कारण गीता अपने बारे में कुछ बता नहीं पाई। जिस तरह से फिल्म में मुन्नी ने इशारों में अपने मुल्क और रिहायशी इलाके के बारे में समझाया था, उसी तरह गीता ने भी भारत के नक्शे में राजस्थान को पहचाना था।
उसने अपने तीन भाइयों के नाम भी बताए थे। इशारों में ये भी बताया था की उसकी मां नाक में बड़ी नथ पहनती थी और दोनों हाथ बड़ी-बड़ी चूड़ियों से भरे रहते थे। वह बचपन में हमेशा घाघरा पहनती थी।
बखूबी समझती है हिंदी, बस वतन लौटने की जिद
संपा के अनुसार गीता हिंदी को अच्छी तरह समझती है। वह बहुत अच्छी हिंदी लिखती भी है और संस्कृत भी समझती है। वह सिर्फ और सिर्फ अपने वतन वापस लौटना चाहती है।
छह माह पहले ठुकराया शादी का प्रस्ताव
गीता के समक्ष छह माह पहले शादी का प्रस्ताव भी रखा गया था। जिसे उसने साफ-साफ ठुकरा दिया। उसने इशारों में बताया कि वह पाकिस्तान में शादी नहीं करना चाहती। वह अपने वतन जाना चाहती है और वहीं शादी करेगी। अगर वह पाकिस्तान में रहती है तो कुंवारी ही जीवन बसर करेगी।
‘गीता’ को स्वदेश लाने के रास्ते
1. भारत सरकार चाहे तो अपनी प्राथमिकता से उसे पाकिस्तान से वापस ला सकती है और यहां अनाथ आश्रम को उसकी जिम्मेदारी दे सकती है।
2. भारत सरकार किसी ट्रस्ट के माध्यम से भी उसे गोद दिलाकर वापस स्वदेश ला सकती है।
3. अगर उसके किसी भी रिश्तेदार को ढूंढा जाए और वह प्रूफ करें तो वापस वतन आ सकती है।
असली नाम पूजा, प्यार से गुड्डी बुलाते थे
एक मूक-बधिर दंपति ने दावा किया है कि चौदह साल पहले सरहद पार कर पाकिस्तान चली गई गीता उनकी बेटी है। दंपति का कहना है कि गीता का असली नाम पूजा है और वे उसे प्यार से गुड्डी बुलाते थे।
राजेश कुमार और राम दुलारी ने बताया कि कि उन्होंने ईदी फाउंडेशन को इस बारे में सूचित किया है। हालांकि जब एक निजी टीवी चैनल ने इस दंपति को लाइव दिखाया और इसके बाद ईदी फांउडेशन से संपर्क साधा गया तो गीता इस दंपति को पहचान नहीं पाई।
मूक-बधिर गीता महज चार साल की थी,जब गलती से सरहद पार कर पाक पहुंच गई थी। तब से उसका परिवार वालों से कोई संपर्क नहीं हुआ। इस दंपति की तस्वीर जब गीता के सामने पेश की गई तो उसने बताया कि उसकी मां साड़ी पहनती थी लेकिन तस्वीर में महिला ने सलवार सूट पहन रखा है।
बिहार से अमृतसर शिफ्ट हुआ था परिवार
गीता के पिता होने का दावा करने वाले राजेश का कहना है कि उनका परिवार बिहार से अमृतसर शिफ्ट हुआ है। वे अमृतसर रेलवे स्टेशन के आसपास कूड़ा उठाने के साथ-साथ भीख मांगते हैं।
दंपति से मिलने आएंगे बर्नी
इस दंपति के दावे के संबंध में पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने कहा कि वह दंपति के बारे में पड़ताल कर रहे हैं। वह 2 सितंबर को भारत आने वाले हैं और इसी दौरान वह दंपति से मुलाकात करेंगे।
गीता के मामले में यह अच्छी प्रगति है। हम लोग डीएनए टेस्ट कराएंगे ताकि हकीकत सामने आ सके। गीता को भारत लाया जाना चाहिए। मैं भारत सरकार से इस मामले में सक्रियता दिखाने की अपील करता हूं।
- अंसार बर्नी, पाक मानवाधिकार कार्यकर्ता