इंजीनियर तेजपाल यादव की याचिका पर हाल ही में 18 जनवरी को एनजीटी की ओर से महेंद्रगढ़ व चरखी दादरी जिले के 343 स्टोन क्रशर पर न्यूनतम 70 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ स्टोन क्रशर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। क्रशर संचालकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस सीटी रवि कुमार की बेंच ने याचिका खारिज कर दी और वापस एनजीटी को मामले से अवगत करवाने का आदेश दिया।
18 जनवरी को एनजीटी ने महेंद्रगढ़ व चरखी दादरी जिले के 343 स्टोन क्रशरों पर न्यूनतम 70 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस पर 64 स्टोन क्रशर संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एनजीटी के आदेश पर स्टे लगाने और केस को सुप्रीम कोर्ट में चलाने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में स्टोन क्रशर संचालकों की तरफ से मौजूद लगभग 33 वकीलों ने 40 मिनट तक बहस की लेकिन याचिकाकर्ता इंजीनियर तेजपाल यादव की तरफ से पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने सारे तर्कों को एक बात कहकर सिरे से खारिज कर दिया कि क्रशर संचालक पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एनजीटी के विगत फैसलों के खिलाफ आ चुके हैं और बार-बार एनजीटी के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर समय को व्यर्थ करने व केस को लंबे समय तक लटकाने की मंशा से पहुंच जाते हैं। इससे न्यायालय के काम और पर्यावरणीय न्याय पर बुरा असर पड़ता है।
वकील प्रशांत भूषण ने 24 जुलाई 2019 को एनजीटी की ओर से इंजीनियर तेजपाल यादव की याचिका पर महेंद्रगढ़ जिले के 72 स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जब 24 जुलाई 2019 को 72 स्टोन क्रशरों के तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया था, तब भी क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और 15 महीने तक सुप्रीम कोर्ट में मामला चलने के बाद दो नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को वापस एनजीटी में भेजा था।
तेजपाल यादव ने कहा एनजीटी को जिला प्रशासन द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट से पता चलता है कि अकेले महेंद्रगढ़ जिले में सिर्फ वायु जनित जानलेवा बीमारियों से ही लगभग प्रति वर्ष 42 हजार लोग बीमार पड़ रहे हैं, अगर यही हालात रहे तो इस बात में कोई दो राय नहीं कि जिस तरह से कोरोना वायरस के दौरान लोग ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए तरस रहे थे, हमें लगता है कि नांगल चौधरी क्षेत्र के लोगों को तो हर समय ऑक्सीजन सिलेंडर के मार्फत अपनी जिंदगी बितानी पड़ेगी क्योंकि हवा में तो जहर घुल चुका है।