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मंजूरी मिली तो जेल में कैद मुस्लिम कर सकेंगे ये काम, हाईकोर्ट में याचिका दायर

Mon, 10 Apr 2017 04:25 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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रोजा इफ्तार
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अगर मंजूरी मिल गई तो जेल में कैद मुस्लिम रोजों के दौरान ये जरूरी काम कर सकेंगे। इसके लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से रोजे के दौरान मुस्लिम कैदियों के लिए इफ्तार और सहरी उपलब्ध करवाने को अनिवार्य करने के निर्देश जारी करने की अपील की गई है।
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याचिका में कहा गया है कि धर्म का अनुसरण करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, भले ही वह जेल में हो इस कार्य को करने में कोई बाधा न हो, यह सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। एडवोकेट मोहम्मद अरशद की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि एक सच्चे मुसलमान के लिए तौहीद, नमाज, जकात, रोजा और हज इस्लाम धर्म के पांच अनिवार्य अंग का पालन अनिवार्य है।

संविधान धर्म के अनुसरण और उसकी पालना की स्वतंत्रता देता है और जेल में भी इस अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। बताया गया कि जेल सुधारों पर ऑल इंडिया जेल रिफार्म कमेटी के अंतर्गत जस्टिस मुल्ला कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 1986 में पेश की थी, जिसमें सिफारिश की गई थी कि जेल में मौजूद कैदियों को इफ्तार (सूर्यास्त के बाद शाम का खाना) और सहरी (सुबह का खाना) का भोजन उपलब्ध करवाया जाए।
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लाउड स्पीकर में अजान अनिवार्य नहीं है

roza iftar program
मो. अरशद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस्माईल फारिक बनाम भारत सरकार मामले में इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि लाउड स्पीकर में अजान अनिवार्य नहीं है, लेकिन धर्म के अनुसरण के लिए तौहीद, नमाज, जकात, रोजा और हज अनिवार्य है। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम के लिए रोजे को अनिवार्य मान चुका है तो ऐसी स्थिति में रोजे का पालन करने की स्थितियों की अनिवार्यता को भी माना गया है।

ऐसे में इफ्तार और सहरी इन्हीं अनिवार्यताओं में से हैं, जिनकी पालना प्रत्येक मुस्लिम का धार्मिक दायित्व है तो धर्म का अनुसरण करने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना राज्य का दायित्व। अरशद ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के 2015 में जारी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने अपने अधीन आने वाले राज्यों को निर्देश दिए थे कि सभी जेलों में इफ्तार और सहरी की व्यवस्था की जाए।

इससे पूर्व हरियाणा जेल प्रशासन को इस बारे में रिप्रजेंटेशन भी दी गई थी, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि हरियाणा, पंजाब और यूटी को निर्देश जारी किए जाएं कि वे जेलों में रोजे के दौरान इफ्तार और सहरी का विशेष भोजन उपलब्ध करवाए। मई के अंत में रोजे आरंभ हो रहे हैं और ऐसे में यह याचिका महत्वपूर्ण है। अगले सप्ताह पीआईएल बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

 
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