बचाव कार्य सही ढंग से नहीं किया गया। इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ-साथ पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया कि बोरवेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी कई निर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बोरवेल/ट्यूबवेल के खुदाई के कार्य की निगरानी संबंधित सरपंच और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी, जबकि शहरी क्षेत्र में यह कार्य भू-जल विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियर, इंजीनियर और नगर परिषद द्वारा किया जाएगा।
यह भी निर्देश दिए गए थे कि बोरवेल व ट्यूबवेल लगाने वाले मालिक को इसके पास सूचना पट्टी भी लगवानी होगी। इस पर बोरवेल की खुदाई करने वाली एजेंसी, उसका पूरा पता, बोरवेल/ट्यूबवेल के उपयोगकर्ता और इसके मालिक का नाम व पता आदि भी लिखवाना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त कुएं की खुदाई करने वाली एजेंसी का जिला प्रशासन के पास पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।