अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर लोकसभा सीट से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के निर्वाचन को जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत चुनौती देने वाली याचिका को याची पक्ष के वकील की लगातार गैर मौजूदगी को आधार बनाते हुए रद्द कर दिया है।
जालंधर निवासी गौरव लूथरा ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि जालंधर लोकसभा सीट से चन्नी सांसद निर्वाचित हुए थे। नामांकन पत्र भरते हुए उन्होंने बहुत सी जानकारियां छुपाई थीं। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव में हुए खर्च का भी सही ब्योरा आयोग को नहीं सौंपा था। चुनाव के दौरान एक होटल में 24 घंटे खाने की व्यवस्था रहती थी, लेकिन इसका खर्च उन्होंने चुनाव प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया। वह रोज 10-15 जनसभाएं करते थे, लेकिन इस दौरान एक भी वाहन का खर्च उन्होंने प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया। रामा मंडी में उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया।
यहां तक कि पोलिंग बूथ के बाहर वोटर स्लिप बांटने के लिए जो बूथ स्थापित किए गए थे, उनके खर्च का ब्योरा भी नहीं दिया गया। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि चुनाव जीतने के लिए चन्नी ने भ्रष्ट साधनों का इस्तेमाल किया और इसके लिए जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत उनका निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए। याची ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत भी दी थी, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे में अब याची को चुनाव याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।