चंडीगढ़। सीबीआई अदालत में सोमवार को ढाई करोड़ की रिश्वत मांगने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मामले में आरोपी शिमला ईडी के सहायक निदेशक विशालदीप और दिल्ली सीबीआई के डीएसपी बलबीर सिंह को अदालत में पेश किया गया। इस दौरान अदालत ने विशालदीप व डीएसपी बलबीर सिंह के वॉयस सैंपल लेने के लिए मंजूरी दे दी। अब वॉयस सैंपल लेकर रिश्वत मांगने की कॉल रिकॉर्डिंग के साथ मैच करवाया जाएगा। आरोपी पक्ष की ओर से दायर आवेदन पर अदालत ने सैंपल लेेने के लिए कुछ शर्तें भी लगाई है।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2012 से 2017 के बीच शिक्षण संस्थानों की ओर से छात्रवृत्ति घोटाले में धन शोधन से जुड़े मामले में शिमला ईडी की टीम कार्रवाई कर रही थी। इसी मामले में शिमला ईडी के सहायक निदेशक विशालदीप की ओर से दो शिक्षण संस्थान संचालकों से ढाई करोड़ रुपये रिश्वत मांगी गई थी। इन संचालकों में चांदपुर ऊना में स्थित देवभूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के संचालक भूपिंद्र कुमार शर्मा को रहीम नाम के व्यक्ति ने फोन कर 55 लाख और कालाअंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन रजनीश बंसल से मुन्नवर नाम के व्यक्ति ने 1.10 करोड़ व 60 लाख रुपये की डिमांड की थी। इस मामले में रिश्वत मांगने पर सीबीआई ने विशालदीप व अन्य के खिलाफ करप्शन एक्ट-7 के तहत केस दर्ज कर लिया था। इसके बाद सीबीआई विशालदीप के अलावा उसके भाई विकासदीप, बुआ के लड़के नीरज और दिल्ली सीबीआई के डीएसपी बलबीर सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। बीते 15 जनवरी को सीबीआई ने वॉयस सैंपल लेने के लिए बीएनएसएस की धारा 349 के तहत आवेदन दायर किया था।