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Chandigarh News: पक्के वेंडर जोन खाली, सड़कें फिर भी घिरीं, वाहन चालक होते परेशान

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मनीमाजरा। मनीमाजरा में नगर निगम के अतिक्रमण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर लाखों रुपये की लागत से बनाए गए पक्के वेंडर जोन खाली पड़े हैं वहीं दूसरी ओर सड़कों, फुटपाथों और चौराहों पर वेंडरों का कब्जा अभी बरकरार है।
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मनीमाजरा व्यापार मंडल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी वेंडरों को सड़कों, फुटपाथ चौराहों से हटाकर निर्धारित वेंडर जोन में शिफ्ट किया जाए। मनीमाजरा व्यापार मंडल के प्रधान मलकीत सिंह का कहना कि इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम के अतिक्रमण हटाने वाली टीमें केवल खानापूर्ति करते नजर आ रही हैं और उच्च अधिकारियों व न्यायालय को स्थिति कुछ और ही दिखा रहे हैं।

जिस का असर यह है कि आज मॉडर्न कांप्लेक्स में संचालित पक्का वेंडर जोन आधे से अधिक खाली पड़ा है। इसके अलावा मोरीगेट बाजार के पास लाखों रुपये की लागत से बनाया गया नया वेंडर जोन भी पूरी तरह खाली है। इसके बावजूद शांति नगर रोड पर शाम के समय वेंडर खुलेआम सड़क पर रेहड़ियां खड़ी करके मंडी लगाकर सब्जी, फल बेचते नजर आते हैं।
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इसी तरह बस स्टैंड के पास वाली सड़क पर कई वेंडरों ने सड़क किनारे पक्के अड्डे बनाकर अभी भी बैठे हैं। अतिक्रमण विभाग के अधिकारी इन्हें ईएसपी श्रेणी का बताकर कार्रवाई से बचते नजर आते हैं। प्रधान मलकीत सिंह का कहना कि सवाल यह उठता है कि यदि वेंडरों के पास स्टॉल हैं तो उन्हें पक्के निर्माण और तिरपाल डालकर अड्डा जमाने की अनुमति कैसे दी जा रही है।

मनीमाजरा व्यापार मंडल के प्रधान मलकीत सिंह का कहना है कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर वे लगातार नजर बनाए हुए हैं। सभी तथ्य एकत्र कर आगामी सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएंगे। उनका आरोप है कि मनीमाजरा में वेंडरों को जरूरत से ज्यादा छूट दी जा रही है। समाजसेवी रामेश्वर गिरी ने कहा कि बस स्टैंड के पास वेंडरों के पक्के ठिकाने देखकर साफ प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो मनीमाजरा में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
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