पंजाब के लोगों को जन्म प्रमाण पत्र समेत 16 प्रकार के सर्टिफिकेट मोबाइल फोन पर ही मिलेंगे। उन्हें अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। पहले लोगों को सर्टिफिकेट की कॉपी लेने के लिए प्रति कॉपी 50 रुपये देने पड़ते थे लेकिन अब उन्हें इसका पैसा नहीं देना पड़ेगा।
पंजाब के शासन सुधार और लोक शिकायत निवारण मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि विभाग की यह नई पहल है। उन्होंने लोगों से उक्त सेवा का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही कहा है कि अगर किसी के पास कोई सुझाव है तो उन्हें भेज सकता है।
इस सेवा के तहत आवेदक के मोबाइल फोन पर एसएमएस द्वारा लिंक भेजा जाएगा। जिस पर क्लिक करके सर्टिफिकेट डाउनलोड हो जाएगा। इस सर्टिफिकेट को सभी दफ्तरों में मंजूर किया जाएगा। इन सर्टिफिकेटों की प्रामाणिकता को ई-सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। अब तक करीब 15 लाख सर्टिफिकेट नागरिकों को मोबाइल फोनों द्वारा दिए जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार पहले सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बड़ी-बड़ी फाइलें सरकारी दफ्तरों में एक टेबल से दूसरे तक जाती थीं। उनकी कोई ट्रेकिंग, स्टेटस चेकिंग और समय-सीमा नहीं होती थी। अब ई-सेवा पोर्टल
esewa.punjab.gov.in ने ऐसे सभी मसलों को हल कर दिया है और फाइल को एक से दूसरी जगह भेजे बिना आवेदनों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। ई-सेवा के लंबित मामलों की संख्या 0.25 फीसदी से भी कम है।
ये सर्टिफिकेट मिलेंगे फोन में
जन्म-मृत्यु, आय, विवाह, संपत्ति, आवास, एससी/बीसी/ओबीसी/जनरल सर्टिफिकेट, बुढ़ापा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा/बेसहारा महिला पेंशन, आश्रित बच्चों के लिए पेंशन और सीनियर सिटिजन आईडी कार्ड अब फोन में मिलेंगे।
ई-सेवा पोर्टल पर 430 से अधिक सेवाएं उपलब्ध
शासन सुधार और लोक शिकायत निवारण विभाग के डायरेक्टर गिरिश दियालन ने बताया कि ई-सेवा पोर्टल को विभाग के 40 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और अन्य तकनीकी माहिरों की टीम की तरफ से तैयार करके इसको सुचारु ढंग से चलाया जा रहा है। इस पोर्टल द्वारा 430 से अधिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस पोर्टल का इस्तेमाल करके अब तक तीन करोड़ से अधिक आवेदनों पर कार्रवाई की जा चुकी है और 6000 से अधिक उपभोक्ता इस प्रणाली का प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें डीसी दफ्तर, एसडीएम दफ्तर, तहसील दफ्तर, एसएमओ दफ्तर, ईओ एमसी दफ्तर, डीएसएसओ दफ्तर, कृषि विभाग के दफ्तर, निजी अस्पताल और सेवा केंद्रों के अधिकारी/कर्मचारी शामिल हैं।