लुधियाना में खूब हुई आतिशबाजी।
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लुधियानवियों ने देर रात तक खूब पटाखे फोड़े। लिहाजा हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हवा जहरीली हो गई। दिन में हवा में प्रदूषण का स्तर 338 से 500 से पार हो गया। इससे जहां कुछ लोगों में सांस लेने की परेशानी महसूस हुई तो आंख में जलन महसूस हुई। लुधियाना, जो औद्योगिक नगरी है। यहां पहले से हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य से अधिक रहता है लेकिन दीवाली व अन्य पर्व पर पटाखे जलाने से हवा में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है।
पूर्व में देखा गया है कि अधिक पटाखे जलाने से शहर में प्रदूषण की धुंध सुबह नजर आती थी। लोगों को सांस लेने की समस्या व आंख में जलन आम बात हो गई है। इसके अलावा पराली जलाने की घटनाएं आग में घी का काम कर रही थी। प्रशासन ने रात आठ से 10 बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति दी थी।
मगर पटाखे देर रात तक कई लोग जलाते रहे। हालांकि पुलिस ने देर रात पटाखे चला रहे लोगों पर केस दर्ज कर दिया है लेकिन बहुत से लोग हैं जो पुलिस की पकड़ में नहीं आए और पटाखे चलाते रहे। दूसरी ओर देर रात पटाखे चलाने से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। रात नौ बजे के करीब ही हवा में प्रदूषण का स्तर 338 दर्ज किया गया जबकि रात 12 बजे के बाद 550 पार कर गया। इससे साफ है कि देर रात तक पटाखे चलाए गए और हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।
सुबह सात बजे के करीब एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 था। डॉ. अरुण मित्रा के मुताबिक लुधियाना की आबोहवा खराब है और इसे और न खराब की जाए, अन्यथा आने वाले दिनों में साफ हवा नसीब नहीं होगी। दमा व सांस संबंधी समस्याएं बढ़ जाएंगी और आंखों की बीमारियां समेत अन्य रोग लोगों को तकलीफ देंगे।
हवा में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए लुधियाना नगर निगम ने दिल्ली की तर्ज पर स्मग गन मंगवाई है लेकिन वह अभी तक नहीं चलाई गई है। उसे शुरू करने में नगर निगम कार्रवाई नहीं कर सका है। गौरतलब है कि स्मग गन से आसमान की तरफ हवा में पानी की बौछारें मारी जाती है। इससे हवा में फैले प्रदूषण के कण धरती पर आ जाते हैं। हवा साफ हो जाती लेकिन यह स्मग गन चलाई नहीं जा सकी है।