पहला, कोविड से बचाव के लिए जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उसे व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझकर पालन करें। दूसरा, घर में जो भी 45 साल से ऊपर के सदस्य हैं, उनका टीकाकरण अवश्य करवाएं। दोनों खुराक लगवानी जरूरी है। दोनों काम एक साथ होने से संक्रमण की चेन टूट जाएगी। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए 14-15 दिनों तक कोरोना के प्रोटोकाल का पालन करना आवश्यक होता है। यदि लोग ऐसा करते हैं तो अप्रैल के आखिरी दिनों या मई की शुरुआत में कोरोना के केसों में गिरावट आने लगेगी।
उन्होंने बताया कि बीते एक हफ्ते में पंजाब के केसों में स्थिरता आ चुकी है, लेकिन चंडीगढ़ में बढ़ रहे हैं। अगले 15 दिन केस और बढ़ने की उम्मीद है। यदि लोगों ने आदतों में बदलाव नहीं किया तो केस बढ़ेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन राज्यों में कोरोना के 30 हजार केस हैं, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में हुई हैं। चंडीगढ़ में तीन अप्रैल तक कोरोना के 27853 केस थे, जबकि मौतें 382 दर्ज की गई हैं। उसके बाद मणिपुर है। यहां पर कोरोना के 29415 केस दर्ज किए गए, जबकि 374 मौतें हैं। उसके बाद मेघालय में 150 मौतें, सिक्किम में 135, लद्दाख में 130 और नागालैंड में 92 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही चंडीगढ़ की संक्रमण दर देश में दूसरे नंबर पर है। तीन अप्रैल तक चंडीगढ़ की एक सप्ताह की संक्रमण दर 13.6 बनी हुई है, जबकि राष्ट्रीय दर 7.1 है।
ये पांच बातें दोहरानी होंगी
- मास्क पहनना, बात करते वक्त दूरी बनाना और बार-बार हाथ धोना।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचें। जरूरी हो तो नियमों का पालन करें।
- घर के 45 साल से ऊपर सभी सदस्यों को कोरोना का टीका लगवाएं।
- टीके की दूसरी डोज लगवाने के बाद भी कोविड से बचाव का पालन करें।
- लक्षण दिखते ही क्वारंटीन हो जाएं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
यदि लोगों ने आदतों में बदलाव किया तो कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकता है। अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि लोग कोरोना से बचाव के नियमों का कितना पालन करते हैं और टीकाकरण कितनी जल्दी करवाते हैं। टीकाकरण पूरी तरह से सुरक्षित है। ज्यादा टीकाकरण से कोरोना कमजोर पड़ेगा।
-प्रो. राजेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
मेरे विचार से लोगों को लंबे समय तक नियमों का पालन करना होगा। साथ में टीकाकरण भी करवाना होगा। जितनी जल्दी टीकाकरण करवाएंगे, उतना इस बीमारी से बचाव होगा अन्यथा यह साल भी पिछले साल की तरह चला जाएगा। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई