किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और राकेश टिकैत।
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हरियाणा के बहादुरगढ़ में किसानों के पड़ाव में कसार गांव के मुकेश के जिंदा जलने के बाद ग्रामीणों ने किसान आंदोलन के नेताओं और पुलिस प्रशासन से गांव के पास बैठे आंदोलनकारियों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की अपील की है। साथ ही कहा कि किसान आंदोलन की छवि को हो रहे नुकसान को काबू करने के प्रयास में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और राकेश टिकैत को उनके गांव में नहीं आना चाहिए, इससे गांव का माहौल बिगड़ेगा।
गांव के पूर्व सरपंच टोनी ने कहा कि उनके गांव कसार के लोगों ने किसान आंदोलन में खूब सहयोग किया। चंदा दिया, दूध पानी उपलब्ध करवाया और किसानों को गांव के पास शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध करवाई लेकिन किसान आंदोलन में शामिल कुछ गलत लोगों की वजह से अब ग्रामीण परेशान हो चुके हैं। आंदोलनकारियों के कई टेंट में शराब चलती है और बहुत ऊंची आवाज में डीजे बजाया जाता है। जिससे गांव की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। किसान आंदोलन में शामिल ऐसे लोग गांव के माहौल को खराब कर रहे हैं।
ग्रामीण मुकेश की मौत के बाद चर्चा चल रही है कि आंदोलन की छवि बिगड़ने से रोकने के लिए किसान नेता और खाप के पंचायती लोग गांव आएंगे और ग्रामीणों से बातचीत कर आंदोलन का पक्ष रखेंगे। इस तरह की संभावनाओं पर टोनी और सतीश ने कहा कि खाप और गांवों के प्रधानों के आने पर उन्हें कोई एतराज नहीं है लेकिन राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी उनके गांव में नहीं आने चाहिए। उनके आने से गांव का माहौल बिगड़ेगा।
उधर, किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने मीडिया के सवाल पर कहा कि फिलहाल वह आंदोलन के काम से अंबाला में व्यस्त हैं और आंदोलन की तरफ से इस मामले को देखने के लिए उन्होंने अपनी यूनियन के जिला प्रधान बल्लू और स्थानीय धरना कमेटी की जिम्मेदारी लगा दी है।