पंजाब ही नहीं गोवा के युवाओं पर भी विलायत का जादू चढ़ा है। पंजाबियों में जहां कनाडा और आस्ट्रेलिया में शिफ्ट होने का क्रेज है, तो गोवा के युवा पुर्तगाल और इंग्लैंड में बसने की आरजू रखते हैं। गोवा के युवाओं का यही क्रेज प्रदेश की खेती के लिए बड़ा संकट बन रहा है। गोवा के ग्रामीण युवा अपनी पुश्तैनी खेतीबाड़ी छोड़ पुर्तगाल और इंग्लैंड में शिफ्ट हो रहे हैं। इसके चलते गोवा में अब खेतीबाड़ी का दायरा सिमटने लगा है। गोवा का फसलीय परिवेश यदि देखें तो यहां चावल, गन्ना, दालें, रागी और कुछ सब्जियों की खेती की जाती है।
नारियल, काजू, सुपारी आम, केला और अनानास की भी यहां खेती होती है। कुछ इलाके में बांस की भी खेती की जा रही है। काजू यहां से निर्यात भी किया जाता है। लेकिन इसके अलावा अन्य फसलों का दायरा अब सीमित होने लगा है। गांव मार्जोडा के ग्रामीण रामचंद्रन ने बताया कि गांव में आज काफी जमीन इसलिए उजाड़ पड़ी है, क्योंकि युवा खेती करने को ही तैयार नहीं हैं। उनके बुजुर्ग उम्रदराज हो रहे हैं और युवाओं में बस यही जुनून है कि वे किसी तरह पुर्तगाल या उसके रास्ते इंग्लैंड जाकर काम करें। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक भी वे खेती को तैयार नहीं होते।
वे होटलों, रेस्तराओं, डिस्को, कैसीनो इत्यादि में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। ग्रामीण सुजल कहते हैं कि यहां तो गांव में ऐसे भी मकान हैं, जिन पर आज तालें लटक चुके हैं। ये मकान उन परिवारों के हैं जो पुर्तगाल और इंग्लैंड में बस चुके हैं। उनकी उपजाऊ जमीनें उजाड़ बन चुकी है। साल में कभी-कभार वे लोग मकान व जमीन की निगरानी को जरूर आते हैं। गांव बेटलबटीम के वासिम ने बताया कि खेती की ओर युवाओं का घटता रुझान चिंता का विषय है। खेती से दूर रहने के लिए युवा कई तरह के बहाने बनाते हैं।
एजेंटों की जद में गोवा के युवा
गोवा केयूथ को विलायत का राह दिखाने में यहां सक्रिय एजेंटों का बड़ा रोल है। प्रदेश में एजेंटों का ऐसा बड़ा रैकेट सक्रिय है, जो युवाओं को न केवल विदेश के सपने दिखाता है, बल्कि पुर्तगाल में बसे लोगों की मदद से गोवा के युवाओं को विभिन्न देशों के जरिए पहले पुर्तगाल पहुंचाता है और फिर वहां से इंग्लैंड।
इसकी एवज में युवाओं से अच्छी खासी रकम ऐंठीं जाती है। दरअसल, 450 साल तक गोवा पुर्तगालियों का अधीन रहा। इसलिए सन 1961 से पहले के जन्में लोगों के लिए पुर्तगाल की नागरिकता लेना बहुत आसान है और एजेंट इन्हीं लोगों का सहारा लेते हुए अपना धंधा चला रहे हैं।
देश की सबसे बड़ी पर्यटन इंडस्ट्री, लेकिन पिछड़े हैं गांव
गोवा आज देश में पर्यटन के क्षेत्र में सबसे बड़ी इंडस्ट्री मानी जाती है। प्रदेश की जनसंख्या भी करीब साढ़े चौदह लाख है। लेकिन हैरत की बात यह कि इस प्रदेश के गांव आज अपेक्षाकृत बहुत ही पिछड़े हुए हैं। इस छोटे से राज्य में मौजूदा सरकार का फोकस गांवों के विकास पर कतई नहीं दिखता।
गांवों की मुख्य सड़क जहां अपने ‘जख्मों’ के साथ राहगीरों का स्वागत करती है, तो वहीं ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। न तो गलियां-सड़कें पक्की, न ही सफाई के इंतजाम, नालियां दिखती नहीं और पानी निकासी का भी पुख्ता इंतजाम नहीं। गांवों में न सरकारी डिस्पेंसरी और न ही गांवों तक पहुंचने का सुलभ साधन। कई-कई गांवों का एक सरकारी स्कूल और पानी की निकासी भी कुछ खास नहीं। लेकिन ऐसे हालातों में ग्रामीण जिंदगी गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।