पढ़ाई या किसी विशेष कार्य के लिए विदेश यात्रा करने वालों को अब दूसरी खुराक के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। पंजाब सरकार ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए दूसरी खुराक की 84 दिन की वैधता को अब 28 दिन कर दिया है। 28 दिन के बाद ऐसे व्यक्तियों को वैक्सीन की दूसरी खुराक राज्य में दी जा सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि विशेष कार्य के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले व्यक्तियों को अब कोविशील्ड टीके की दूसरी खुराक 28 दिनों के बाद दी जा सकेगी। सिद्धू ने कहा कि पंजाब सरकार ने कोविशील्ड टीके की दूसरी खुराक के निर्धारित समय को घटाने के लिए कई बार यह मुद्दा भारत सरकार के समक्ष उठाया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों खास कर विद्यार्थियों को टीकाकरण की सुविधा दी जा सके।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पढ़ाई के लिए बड़ी रकम देने और टीकाकरण की पूरी खुराक न लेने के कारण विद्यार्थी विदेश नहीं जा सके। विद्यार्थियों और उनके माता-पिता की तरफ से बार-बार पंजाब सरकार से अपील की जाती रही है कि वह कोविशील्ड की दूसरी खुराक के अंतराल को घटाएं।
सिद्धू ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सिफारिशें जारी की हैं, जिसके अनुसार पढ़ाई के मकसद के लिए विदेश यात्रा करने वाले विद्यार्थी कोविशील्ड टीकाकरण की दूसरी खुराक के लिए योग्य लाभार्थी होंगे जिनके लिए निर्धारित समय अंतराल 28 दिनों बाद, लेकिन 84 दिनों से पहले होगा। टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले, विदेशी मुल्कों में नौकरी करने वाले, एथलीटों, खिलाड़ियों और उनके साथ जाने वाले भारत स्टाफ के कर्मचारी इस टीकाकरण के लिए योग्य होंगे।
सिर्फ 31 अगस्त तक लागू
सिद्धू ने बताया कि यह निर्देश सभी डिप्टी कमिश्नरों को अगली कार्रवाई के लिए जारी किए गए हैं। पहली खुराक की तारीख के बाद 84 दिनों की मियाद से पहले दूसरी खुराक के प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन के द्वारा निर्धारित एक समर्थ अथॉरिटी इसकी जांच करेगी। यह एसओपी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए 31 अगस्त, 2021 की मियाद तक लागू हैं।
कोविशील्ड के लिए सिर्फ एसओपी
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि एसओपी को सिर्फ कोविशील्ड के लिए विशेष तौर पर जारी किया गया है क्योंकि कोविशील्ड की 2 खुराकों के बीच समय का अंतराल 6-8 हफ्तों से बढ़ा कर 12-16 हफ्तों तक किया गया था। कोवाक्सिन की मियाद 4-6 हफ्तों की है, इसलिए उसकी दूसरी खुराक के लिए किसी विशेष प्रबंध की कोई जरूरत नहीं थी।