चंडीगढ़। शहर में तेजी से बढ़ते कोरोना के मरीजों से स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की परेशानी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ लोगों की लापरवाही व अनदेखी भी जारी है। शहर में ऐसे तमाम परिवार हैं, जिनके घरों में 2 से 3 हफ्ते पुराने बुखार के मरीज हैं, लेकिन वह कोरोना जांच कराने की बजाय उसका घरेलू उपचार करने में जुटे हुए हैं। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई है कि वे लोग खतरे से अनजान अस्पतालों, दुकानों व अन्य जगहों पर जाकर नौकरी भी कर रहे हैं। आने वाले खतरे से बेखबर वे अनजाने में खुद से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को संक्रमण में झोंकने का काम कर रहे हैं।
केस- 1
सेक्टर 46 निवासी मनोहर सिंह (बदला हुआ नाम) के परिवार के तीन सदस्यों को 2 हफ्ते से लगातार बुखार आ रहा है, लेकिन कोरोना जांच कराने की बजाय वे घरेलू उपचार कर रहे हैं। स्थिति यह है कि उनके परिवार का एक सदस्य दवा की दुकान पर नौकरी करता है तो दूसरा सब्जी मंडी में। ऐसे में उन दोनों से प्रतिदिन मिलने वाले सैकड़ों लोग संक्रमण की जद में आ रहे हैं।
केस- 2
सेक्टर- 15 निवासी बाबू राम (बदला हुआ नाम) की मां को 13 दिन से बुखार आ रहा है, लेकिन वह भी उनकी कोरोना जांच नहीं करवा रहे हैं। बाबूराम भी एक निजी अस्पताल में नौकरी करते हैं। उनके संपर्क में भी प्रतिदिन 100 से डेढ़ सौ मरीज आ रहे हैं, जो अनजाने में कोरोना की चेन को और मजबूत करने का काम कर रहे हैं।
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पॉजिटिव होने का खतरा बना कारण
ऐसे परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात का खतरा सता रहा है कि अगर उन्होंने कोरोना जांच कराई तो पॉजिटिव हो जाएंगे। फिर ना तो घर से बाहर निकल पाएंगे ना नौकरी पर जा पाएंगे। उनका कहना है कि पिछले एक साल से कोरोना के कारण स्थिति बहुत खराब है। अगर अब वे पॉजिटिव हो गए तो फिर नौकरी रहेगी या जाएगी, कुछ पता नहीं।
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पुलिस को दें इसकी सूचना :डॉ. अमनदीप कंग
ऐसी स्थिति पर काबू के लिए ऐसे लोगों के पड़ोसी इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर पर दे सकते हैं। निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि इस संदर्भ में प्रशासन से बात की जाएगी। इसके लिए अलग से हेल्पलाइन नंबर जारी किया जा सके, ताकि ऐसे लोगों को ट्रेस कर तत्काल उनकी कोरोना जांच करवाकर संक्रमण की चेन को कमजोर किया जा सके।