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भूतों को पेंशन: रिटायर चपरासी को बताया गया पेंशन घोटाले का सूत्रधार, हाईकोर्ट ने जांच के रवैये पर उठाया सवाल

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बिना उच्च अधिकारियों के चपरासी कैसे कर सकता है इतना बड़ा घोटाला, हमारी समझ के परे
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अफसरों व पार्षदों पर आपराधिक कार्रवाई को लेकर सीबीआई से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
चंडीगढ़। भूतों (अपात्र, मृतकों व अस्तित्व विहीन लोगों) को पेंशन बांटने के मामले में सरकार ने एक रिटायर चपरासी को घोटाले का सूत्रधार बताते हुए उससे 14 लाख रुपये की वसूली कर चार्जशीट दाखिल कर दी है। याची की दी गई इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि बिना किसी अधिकारी की मिलीभगत के कैसे इतना बड़ा घोटाला हो सकता है, यह हमारी समझ के परे है। हाईकोर्ट ने अब सीबीआई से पेंशन की मंजूरी देने वाले अधिकारियों व पार्षदों पर आपराधिक कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।
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इस मामले में याचिका दाखिल करते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश बैंस ने एडवोकेट प्रदीप रापडिया के माध्यम से हाई कोर्ट को हरियाणा में हुए पेंशन वितरण घोटाले की 2017 में जानकारी दी थी। याची ने बताया कि कैग रिपोर्ट के अनुसार पेंशन वितरण में बड़ा घोटाला हुआ। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ऐसे व्यक्तियों को भी पेंशन बांट दी जो या तो स्वर्ग सिधार चुके थे या पेंशन लेने की योग्यता ही पूरी नहीं करते थे। इस प्रकार सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया। याची ने कहा कि उन्हें हरियाणा विजिलेंस से कोई उम्मीद नहीं है और इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाई जाए। हाई कोर्ट ने इस मामले मेंं सीबीआई को प्राथमिक जांच का आदेश दिया था और इसी के अनुरूप सीबीआई ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंप दी है। सीबीआई ने हाई कोर्ट के सामने स्टेट्स रिपोर्ट दायर करते हुए बताया कि हरियाणा भर के दोषी जिला समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। याची ने बताया कि पुलिस ने एक रिटायर चपरासी को इस घोटाले का सूत्रधार बताते हुए गिरफ्तार किया था। उससे 14 लाख रुपये की रिकवरी करके चालान भी दाखिल कर दिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई से पूछा है कि क्या मंजूरी देने वाले अधिकारियों व पार्षदों पर भी आपराधिक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि कैसे एक चपरासी बिना अधिकारियों की मिली भगत के इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकता है।
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