चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) का दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की इच्छा पर निर्भर करेगा। पेक ने उनके सामने दो विकल्प रखते हुए कहा कि यदि मार्च में दीक्षांत समारोह आयोजित करना है तो अभिभावकों को आने की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि कोरोना चल रहा है। ऐसे में भीड़ नहीं हो पाएगी। गाइडलाइन का पालन करना होगा। यदि अभिभावकों को लाना चाहते हैं तो फिर दीक्षांत समारोह तभी होगा जब कोरोना से हालात सामान्य हो जाएंगे। इसके लिए पेक सर्वे कराएगा। विद्यार्थियों के आए सुझावों के बाद यह निर्णय लिया जाएगा।
बुधवार को हुई पेक सीनेट की बैठक में दीक्षांत समारोह को लेकर काफी बातचीत हुई। सभी ने कहा कि कोरोना से हालात सामान्य नहीं हुए हैं। अभिभावक विद्यार्थियों के साथ आएंगे तो भीड़ काफी बढ़ेगी और इससे कोरोना आदि का प्रसार हो सकता है। इसी को देखते हुए अब विद्यार्थियों के सुझावों पर इस निर्णय को छोड़ दिया गया। वहीं बैठक में बीटेक के विद्यार्थियों को मनचाहा विषय पढ़ने का प्रस्ताव रखा गया। इसे च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम कहते हैं। विद्यार्थियों को कौन-कौन से कोर्स पढ़ने होंगे, इसके लिए विस्तृत रूपरेखा पेक बनाएगा और अगली बैठक में उसे लाया जाएगा। उसके बाद इसे मंजूरी दी जाएगी। मालूम हो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस सिस्टम को पूरी तरह से लागू करने की बात कही गई है। इसी को देखते हुए पेक ने इसे अपनाया और इसे लागू करने की योजना बनाई।
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डाटा सेंटर को मंजूरी, बनाएंगे विस्तृत योजना
आने वाले समय में डाटा विश्लेषण में नौकरियों की भरमार होगी। हर क्षेत्र में आंकड़ों का विश्लेषण होता है और उसी विश्लेषण के आधार पर कंपनियां अपने उत्पाद आदि बनाती हैं और उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं। नौकरी इस क्षेत्र में आसानी से मिल जाती है और वेतन भी मोटा मिलता है। इसी को देखते हुए पेक डाटा विश्लेषण सेंटर का शुभारंभ करेगा। यह अपने में अलग होगा। इसका कोर्स शुरू होगा तो विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिलेगा। कंप्यूटर सेंटर विभाग इसका प्रस्ताव विस्तृत रूप से तैयार करेगा और उसे अगली बैठक में रखा जाएगा। मालूम हो कि पीयू में भी डाटा विश्लेषण को लेकर विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं और वहां के विद्यार्थी भी इसके जरिए आगे बढ़े हैं। उन्हें नौकरियां अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में मिली हैं।
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अगले सत्र से शुरू हो सकते हैं नए पाठ्यक्रम
हर साल संस्थान बाजार के मुताबिक नए पाठ्यक्रम शुरू करते हैं। इसी को देखते हुए पेक ऐसा पाठ्यक्रम शुरू करेगी, जिससे विद्यार्थियों को अधिक से अधिक लाभ मिले और उसके लिए रकम भी कम चुकानी पड़े। एक पाठ्यक्रम को पेक ने पिछली बैठक में निर्णय लेकर बंद कर दिया था, क्योंकि तीन साल से उस कोर्स में आवेदन गिनती के आ रहे थे।