पूर्व रेलमंत्री पवन बंसल 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक्शन मोड में आ गए हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव में अभी छह माह से ज्यादा का समय बचा हुआ है। खुद सक्रिय होने के साथ बंसल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी जोश भरने में जुट गए हैं। सोमवार को भारत बंद के दौरान इसकी झलक नजर आई। कांग्रेस का भारत बंद भले ही चंडीगढ़ में बेअसर नजर आया लेकिन बंद को लेकर बंसल ने कांग्रेस के सभी पुराने और नए कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाकर उन्हें एक मंच पर खड़ा जरूर कर दिया।
बाजारों में जो रैली निकाली गई, उसमें कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ नजर आई। इसका कारण यह भी था कि बंसल ने खुद कार्यकर्ताओं को जोड़ने की बागडोर अपने हाथ में संभाल ली है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि वह लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रबल दावेदार हैं जबकि इस बार मनीष तिवारी ने भी शहर से पार्टी टिकट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
पिछले पांच लोकसभा चुनावों में पार्टी बंसल को ही यहां से उम्मीदवार बना रही है। सोमवार हुए प्रदर्शन में कांग्रेस के वह पुराने चेहरे भी दिखे जो कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद घर बैठ गए थे। कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का भी बंसल को पूरा सहयोग मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ता जुटा कर बंसल और छाबड़ा ने अपनी ताकत भी दिखाने का प्रयास किया।
उधर, खेर ने भी संभाला मोर्चा
सांसद किरण खेर भी हर दिन दो से तीन कार्यक्रमों में शामिल हो रही हैं और खुलकर कांग्रेस पर हमला कर रही हैं। जबकि भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन अपने अलग अलग पार्टी कार्यक्रम करके अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। लेकिन खेर और टंडन नेताओं में भारी गुटबाजी है। टंडन भी अगला लोकसभा चुनाव पार्टी टिकट पर लड़ना चाहते हैं।
आगे प्रदर्शन और कार्यक्रम जारी रहेंगे
कांग्रेस पार्टी ने आगे प्रदर्शन और वार्ड वाइज कार्यक्रम करने की रणनीति बनाई है जो कि शुरू होने वाले हैं। इसके लिए प्रदेश और जिला कार्यकारिणी को प्रोग्राम दिए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार अगले दिनों में राफेल डील विवाद पर पूरे शहर में प्रदर्शन किए जाएंगे।
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस में गुटबाजी काफी कम
कांग्रेस पार्टी को एक फायदा यह है कि उनके यहां पर भाजपा के मुकाबले में काफी कम गुटबाजी है। जबकि भाजपा के नेता कई बार खुलकर अपनी गुटबाजी दिखा चुके हैं। इसी गुटबाजी का फायदा पिछले साल किरण खेर को मिला था। पार्टी ने यहां के नेताओं की टिकट काटते हुए खेर को मैदान में उतारा था। चुनाव के बाद कांग्रेस को लगता था कि खेर जीतने के बाद मुंबई चली जाएंगी लेकिन इस समय शहर में सांसद किरण खेर की सक्रियता भी कांग्रेस के लिए मुश्किल बनी हुई है। खेर और बंसल एक दूसरे की गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं।
अगला चुनाव काम के आधार पर होगा
अगला लोकसभा चुनाव पूरी तरह से यूपीए और मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए कामों के आधार पर होगा। जबकि पिछले चुनाव में पीएम मोदी का नाम हावी था। लेकिन अगले चुनाव में शहर में किए गए काम और भाजपा द्वारा किए गए वायदों को भी परखा जाएगा।