पूरी दुनिया के लोगों को नोबल विद्वानों की उपलब्धियों और कहानियां बताने के साथ यह प्रोग्राम लोगों को अल्फ्रेड नोबल के जीवन दर्शन के अनुरूप विज्ञान, साहित्य व शांति के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। जैव तकनीक विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने कहा कि पीएयू ने कृषि क्षेत्र में नई क्रांति और भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है।
नोबल पुरस्कार में भाग लेने वाले छात्र, शिक्षक और वैज्ञानिक कृषि जल एवं जलवायु के क्षेत्र में भारतीय शोध में अग्रणी है। पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने कहा कि नोबल पुरस्कार श्रृंखला 2019 के जरिए एनएबीआई, मोहाली और पीएयू लुधियाना के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं इस क्षेत्र के वैज्ञानिकों के लिए नोबल विद्वानों से मिलने व विचार सांझा करने का अनोखा अवसर है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से जो कल्पना शक्ति जागती है वह हमारे विद्यार्थियों को विज्ञान में उत्कृष्टता पाने का उत्साह देगी। इसमें सहयोग देकर आयोजन को विशिष्ट बनाने के लिए भारत सरकार के जैवतकनीक विभाग व पंजाब सरकार के अति आभारी है।
समागम के दौरान पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से 1500 के करीब विद्यार्थियों, अध्यापकों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान मनुष्य की बेहतरी के लिए प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस अवसर पर डॉ. गुरिंदर सिंह सांघा, डॉ. केएस थिंद, डॉ. आरआईएस गिल, डॉ. तेजिंदर सिंह रियाड़ और डॉ. जगदीश कौर मौजूद थे।