फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दर्द से निजात: यूरिनरी ब्लैडर कैंसर की सर्जरी में कैथेटर से अब मरीज को नहीं होगी पीड़ा, पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग ने ढूंढी तकनीक

Sat, 16 Apr 2022 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एनेस्थीसिया विभाग की ओर से यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर वाले मरीजों पर शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को और आगे बढ़ाने की योजना है। शोध करने वाली टीम के अनुसार प्रारंभिक चरण में किए गए शोध से मरीज को 6 से 8 घंटे के लिए दर्द से मुक्ति दिलाने में सफलता मिल चुकी है।
विज्ञापन
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर वाले मरीजों को अब सर्जरी के बाद कैथेटर से असहनीय पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी। पीजीआई के विशेषज्ञों ने इस दर्द से निजात दिलाने की तकनीक ढूंढ ली है। इससे सर्जरी के बाद शुरुआती घंटों में होने वाले दर्द को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। मरीज 7 से 8 घंटे बाद हल्का दर्द महसूस करने लगेगा। यूरिनरी कैथेटर एक लचीली, खोखली ट्यूब होती है जिसे मूत्राशय में डालकर मूत्र को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

विज्ञापन


शोध विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज में सर्जरी के बाद 24 घंटे से 7 दिन तक कैथेटर रखने की नौबत आ जाती है। उसे कैथेटर के कारण काफी परेशानी होती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू किया गया है। पहले चरण में सफलता मिलने से मरीजों को राहत मिलने लगी है।

94 मरीजों पर किया शोध 

शोध के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर व एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजय सिंह ने बताया कि सर्जरी के दौरान मरीज को लगातार फ्ल्यूड दिया जाता है। इस बीच फ्ल्यूड की आखिरी बोतल में लिग्नोकेन इंजेक्शन डाल दिया जाता है। इसके प्रभाव से मरीज का ब्लैडर और उसके आसपास का क्षेत्र सुन्न हो जाता है जिससे मरीज को कम से कम 8 घंटे तक आराम मिलता है। डॉ. अजय ने बताया कि इस शोध में यूरिनरी ब्लैडर कैंसर के 94 मरीजों पर परीक्षण किया गया। इसमें इन मरीजों को दो वर्गों में बांटा गया। एक वर्ग में शामिल 47 मरीजों को सर्जरी के दौरान लिग्नोकेन इंजेक्शन दिया गया और दूसरे वर्ग के मरीजों पर पहले वाली प्रक्रिया अपनाई गई। जिन मरीजों को इंजेक्शन दिया गया, उन्होंने सर्जरी के लगभग 8 घंटे के बाद थोड़े दर्द की शिकायत की जबकि दूसरे वर्ग में शामिल मरीजों का सर्जरी के बाद कैथेटर के कारण दर्द से बुरा हाल था। दोनों वर्गों में शामिल मरीजों की सर्जरी के बाद पहले, दूसरे और छठे घंटे में दर्द की स्थिति मापी गई। इसमें इंजेक्शन दिए जाने वाले ग्रुप के मरीजों ने 6 घंटे के बाद थोड़े दर्द की बात कही।  

शोध में इनका रहा सहयोग 

एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख प्रो. जीडी पुरी के नेतृत्व में किए गए शोध में यूरोलॉजी विभाग के डॉ. गिरधर वोरा के साथ एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजय सिंह, डॉ. शिव लाल सोनी, डॉ. नवीन नायक, डॉ. वेंकट गणेश, डॉ. विकास सैनी और डॉ. तन्वीर सामरा शामिल रहे। 

प्रयास जारी है, ताकि दर्द पूरी तरह खत्म हो सके

एनेस्थीसिया विभाग की ओर से यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर वाले मरीजों पर शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को और आगे बढ़ाने की योजना है। शोध करने वाली टीम के अनुसार प्रारंभिक चरण में किए गए शोध से मरीज को 6 से 8 घंटे के लिए दर्द से मुक्ति दिलाने में सफलता मिल चुकी है। अब इस समय सीमा को और ज्यादा करने पर काम किया जा रहा है ताकि सर्जरी के बाद मरीज को 24 घंटे तक दर्द हो ही न। 

यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर वाले मरीजों में सर्जरी के बाद कम से कम 24 घंटे और ज्यादा से ज्यादा 7 दिन तक कैथेटर रखना पड़ता है। इससे मरीज को सर्जरी के बाद काफी दर्द सहना पड़ता है, लेकिन शोध से मिले परिणाम के आधार पर अब हम नई प्रक्रिया का प्रयोग कर रहे हैं। उससे मरीजों को काफी राहत मिल रही है - डॉ. जीडी पुरी, डीएन एकेडमिक व एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख, पीजीआई चंडीगढ़

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें