चंडीगढ़। कोरोना संक्रमितों के होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने से मरीजों के साथ अस्पताल प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। एक तरफ मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के तनाव से मुक्ति मिल गई है, वहीं अस्पतालों में बेड फुल होने की समस्या काफी हद तक कम हो रही है। इस समय में शहर के लगभग 400 मरीज होम आइसोलेट हैं। इनमें से 155 मरीजों का होम आइसोलेशन पीरियड पूरा भी हो चुका है।
अस्पताल प्रशासन ने इन मरीजों की मॉनीटरिंग के लिए क्षेत्र के अनुसार रैपिड रिस्पांस टीम गठित की है। इसके अलावा प्रशासन के निर्देश पर मरीजों के लिए अलग से हेल्प डेस्क बनाया गया है, जिससे विशेषज्ञ ऑनलाइन मरीजों से संपर्क कर उनकी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ले रहे हैं।
जीएमएसएच-16 की स्थिति थी खराब
कोरोना के संदिग्ध मरीजों के साथ ही एसिमटोमैटिक मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों के बेड भरने लगे थे। सबसे ज्यादा परेशानी जीएमएसएच-16 में हो रही थी। वहां एक दिन में 200 से 250 मरीज भर्ती किए जा रहे थे। इससे इमरजेंसी के साथ अन्य सुविधाएं प्रभावित हो रही थीं, जिससे बचाव के लिए अस्पताल प्रशासन ने होम आइसोलेशन शुरू करने के लिए प्रशासन से अनुरोध किया था। जुलाई के अंतिम सप्ताह में जीएमएसएच को होम आइसोलेशन देने की अनुमति प्रदान की गई, जिसके बाद होम आइसोलेशन के मानकों के अनुरूप मरीजों को चिह्नित कर होम आइसोलेट किया जाने लगा। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि होम आइसोलेशन के मरीजों का लगातार फॉलोअप लिया जा रहा है। उन्हें किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तत्काल अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है।
इन शर्तों पर मिलती होम आइसोलेशन की सुविधा
होम आइसोलेशन की सुविधा उन्हीं लोगों को दी जा रही है, जोकि बिना लक्षण या हल्के लक्षण वाले हैं। जिन मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है या और कोई क्रॉनिक बीमारी है तो उन्हें इसकी छूट नहीं है। हालांकि, होम आइसोलेट रहने के लिए कई शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। उसको पूरा करने के बाद ही संक्रमित इसका लाभ उठा सकता है। जैसे कि उसके पास परिवार से अलग कमरा और शौचालय होना, एंड्रायड फोन और होम आइसोलेशन एप डाउनलोड कर उसे चलाना आना, दवाओं की किट सहित कई चीजें अनिवार्य हैं।