शुक्रवार को निगम के एक कार्यक्रम में प्रशासक ने कहा कि शहर में आबादी से ज्यादा गाड़ियां हो गई हैं और सड़कों को ही पार्किंग बना दिया है। लोगों को गाड़ी रखने के लिए निजी गैरेज बनाना चाहिए और अगर सड़क पर खड़ी करनी है तो उसका शुल्क देना होगा। उन्होंने बढ़ते वाहनों को शहर की व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताया और अधिकारियों तथा आम लोगों से सप्ताह में एक दिन गाड़ी छोड़कर साइकिल या पैदल चलने की अपील की। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सस्ता और बेहतर बनाने पर जोर दिया।
रात 12 बजे के बाद गाड़ियां ही नजर आती
प्रशासक ने कहा कि रात 12 बजे के बाद अगर आप सारा शहर घूमकर आते हैं तो लगता है कि शहर तो गाड़ियों से भरा हुआ है। सड़क पर गाड़ी खड़ी करने के लिए किराया लेना होगा, तब जाकर समस्या का हल होगा। उसके अलावा ऐसी सड़कें बनाना चाहिए जो करीब लंबे समय तक चले। इस संदर्भ नगर निगम के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना है कि प्रशासक की बात के बाद बयान देना ठीक नहीं है। अगर प्रशासक का आदेश रहेगा तो वह इस फैसले को लागू करेंगे।
आबादी 13 लाख... गाड़ियां 15 लाख के पार
रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शहर में इस समय करीब 15 लाख वाहन पंजीकृत हैं जबकि आबादी लगभग 13 लाख है। पिछले पांच वर्षों में 2 लाख 21 हजार 497 नई गाड़ियां रजिस्टर्ड हुई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा टू व्हीलर और कारें शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की नंबर प्लेट वाली गाड़ियां भी बड़ी संख्या में रोज शहर में चलती हैं। अनुमान है कि रात के समय अलग अलग सेक्टरों में करीब 5 लाख से ज्यादा वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं जिससे पार्किंग और ट्रैफिक की समस्या और गंभीर होती जा रही है।