चंडीगढ़। फीस मुद्दे को लेकर प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ पैरेेंट्स ने हल्लाबोल दिया है। आलम यह है कि कोरोना के डर से जहां देश के लोग घर के अंदर बैठे हैं, वहीं शहर के लोग बारिश और खराब मौसम में भी अपने बच्चों के भविष्य के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। पिछले हफ्ते से प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की कड़ी में शुक्रवार को सौपिंस स्कूल-32 और आशियाना पब्लिक स्कूल सेक्टर-46 के बाहर पैरेंट्स ने धरना दिया।
सौपिंस स्कूल के बाहर परिजन एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में फीस वृद्धि व प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर पकड़े हुए थे। वहीं स्कूल के डायरेक्टर अमरबीर सिंह सिद्धू ने परिजनों से मिले बिना गाड़ी का शीशा नीचे कर ही कहा- चाहे जितने मर्जी प्रदर्शन कर लो, हम अपने स्कूल के नियम नहीं बदलेंगे। उनकी यह वीडियो क्लिप भी शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुई। परिजन बारिश में भी 11 बजे पहुंचकर प्रदर्शन करते रहे
क्या कहते हैं परिजन
मैं एक प्राइवेट सेक्टर में जॉब करता हूं। मेरी 25 फीसदी सैलरी कट कर आ रही है। वहीं इस माहौल में भविष्य का भी नहीं पता तनख्वाह मिलेगी भी कि नहीं। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इन सबके साथ दो बेटों की पूरी स्कूल फीस भरना बहुत कठिन है।
रवि, सेक्टर- 22
बच्चों को सिर्फ रोजाना 2 घंटे की ऑनलाइन क्लासेज दी जा रही हैं। नई क्लास का सिलेबस नया होने के कारण बच्चे को कुछ समझ नहीं आ रहा है। क्योंकि ऑनलाइन क्लास में फिजिकल क्लासरूम जैसी व्यवस्था नहीं है। फिर भी स्कूल ऑनलाइन क्लास के किस बात की बढ़ाकर फीस ले रहा हैं। जब बच्चे स्कूल जा ही नहीं रहे तो 31 से पहले प्रशासन और स्कूल परिजनों पर फीस जमा करवाने का प्रेशर क्यों बना रहे हैं।
कीर्ति, सेक्टर 19
आशियाना स्कूल के बाहर पैरेंट्स का प्रदर्शन, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी हुए शामिल
चंडीगढ़। सेक्टर-46 ए स्थित आशियाना पब्लिक स्कूल में पैरेंट्स ने 50 प्रतिशत फीस लेने के लिए प्रदर्शन किया। वहीं परिजनों ने स्कूल पर आरोप लगाया कि जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई, स्कूल ने उन्हें छुट्टियों का होमवर्क नहीं दिया। इस दौरान प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी पहुंचे। उन्होंने परिजनों के प्रदर्शन का समर्थन किया।
स्कूल के बाहर प्रदर्शन में शामिल सेक्टर-46 निवासी परिजन ने बताया कि उनका लड़का तीसरी और लड़की 8वीं में पड़ती है। दोनों बच्चों की मिलाकर तीन महीने की 27 हजार 600 रुपए फीस देनी है। उनका प्राइवेट ट्रेडिंग का बिजनेस है। लॉकडाउन के कारण ये बंद पड़ा है। ऐसे में फीस देना संभव नहीं है। जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई, उन बच्चों को स्कूल ने छुट्टियों का काम नहीं दिया।
परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। स्कूल की तरफ से रेगुलर बच्चों की ऑनलाइन क्लास लगवाई जा रही है।
ललिता प्रकाश, स्कूल डायरेक्टर