जच्चा-बच्चा मौत मामले में एफआईआर के विरोध में हड़ताल पर गए पीजीआई के डॉक्टरों को वरिष्ठ आईएएस अफसर प्रदीप कासनी भी नहीं मना पाए। सोमवार को नौ घंटे तक मान मनौव्वल के बाद भी डॉक्टर हड़ताल खत्म करने को राजी नहीं हुए।
इस दौरान रात करीब 11 बजे विजय पार्क में कासनी के प्रस्ताव पर डॉक्टरों ने हूटिंग की। इस पर कासनी भड़क गए और कहा कि तुम्हें अब कानून ही समझाएगा। इससे पूर्व दिन भर पीजीआई में करीब सात से आठ हजार मरीज पहुंचे। लेकिन ओपीडी में डॉक्टरों ने उन्हें ढंग से देखा तक नहीं और आपात विभाग में आए मरीजों को डॉक्टरों ने खानपुर मेडिकल कॉलेज का रास्ता दिखा दिया। ऐसे में मरीजों की जान पर बनी हुई है।
हड़ताल के चौथे दिन दोपहर दो बजे के करीब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी रोहतक पहुंचे और हड़ताल खत्म करवाने की कवायद शुरू की। एमडीयू के फैकल्टी हाउस में पीजीआई के वरिष्ठ अधिकारियों व हड़ताली डॉक्टरों के साथ उनकी छह घंटे तक मैराथन बैठक चली।
ठोस नतीजा नहीं मिलने पर भी कासनी ने कहा कि इंशा अल्लाह हड़ताल खत्म हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। रात करीब 11 बजे कासनी जब दोबारा विजय पार्क में हड़ताली डॉक्टरों से हड़ताल समाप्त करने की गुजारिश करने पहुंचे तो डॉक्टरों का रवैया खासा नकारात्मक रहा। कासनी ने कहा कि मामले को हल करने के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी जो दस दिन में रिपोर्ट देगी।
इस पर डॉक्टर बोले, कि हम दस दिन तक हड़ताल पर ही रहेंगे। तो कासनी भी भड़क गए। इस दौरान डॉक्टरों ने कासनी की हूटिंग भी की। उधर, मीडियाकर्मियों से बातचीत में कासनी ने कहा कि पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज एफआईआर किसी भी हालत में रद नहीं की जाएगी। इससे पूर्व, दिल्ली बाईपास स्थित सर्किट हाउस में कासनी ने पहले हेल्थ विवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. वी. के. जैन से हड़ताल पर चर्चा की।
विज बोले, मारपीट से गई जान, यह क्रिमिनल केस
अंबाला। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि डॉक्टर कार्रवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दे रहे हैं। मगर मैं डॉक्टरों को बताना चाहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश वहां लागू होंगे, जहां इलाज के दौरान मरीज की जान जाएगी। मगर इस मामले में पीड़ित ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसके व उसकी गर्भवती पत्नी के साथ पीजीआई में मारपीट की गई। जिससे उसकी पत्नी गिर गई। जिससे उसकी और बच्चे की मौत हो गई। इसलिए यह सीधे-सीधे क्रिमिनल केस बनता है, जो पुलिस ने दर्ज किया है, इसलिए इस मामले में हड़ताल का दबाव बनाने की जरूरत नहीं, डॉक्टर कानून को अपना काम करने दें और वे हड़ताल खत्म कर वापस आ आएं, यदि डॉक्टर ने कुछ नहीं किया तो वे निर्दोष साबित हो जाएंगे।