एसी जोशी पुस्तकालय की पांचवीं मंजिल पर पहले जहां पुरानी रखी किताबें धूल खा रही थीं, अब वहां संरक्षण प्रयोगशाला (कंर्जवेशन लैब) बनने जा रही है। पंजाब विश्वविद्यालय उत्तर भारत का पहला विश्वविद्यालय बनेगा, जहां राष्ट्रीय अभिलेखागार के मानकों के तहत संरक्षण प्रयोगशाला बनेगी। प्रयोगशाला में हस्तलिपियां, पुरानी पुस्तकों का संरक्षण हो पाएगा और उन्हें रखने के लिए पर्याप्त पर्यावरण रहेगा।
असिस्टेंट आर्काइविस्ट डॉ. मृत्युंजय कुमार ने बताया कि पेपर संरक्षण के लिए चार चरण की प्रक्रिया होती है लेकिन अभी उनके पास उसे पूरा करने के लिए प्रयोगशाला नहीं है। अभी इनके संरक्षण के लिए वह केवल प्रिवेंटिव मेजर ही ले पाते हैं। प्रयोगशाला बन जाने से उन्हें दुर्लभ किताबों और हस्त लिपियों और अन्य 100 साल से पुराने दस्तावेजों के संरक्षण की समस्या नहीं आएगी। पांचवीं मंजिल पर 50 लाख की लागत से संरक्षण प्रयोगशाला के साथ, प्रदर्शनी केंद्र, रिकॉर्डिंग रूम और रिपॉजिटरी बनाई जाएगी। साल 2019 में लैब बनाने के लिए 50 लाख रुपये अनुदान मिला, जिसमें से अभी तक दो लाख 33 हजार रुपये प्रयोग हो गए हैं। कोविड और कागजी काम के चलते लैब बनने में देरी हुई लेकिन अब धरातल पर काम शुरू हो गया है। एसी जोशी पुस्तकालय को विरासत का दर्जा प्राप्त है, इसकी पांचवीं मंजिल पर प्रयोगशाला और अन्य तीन चीजों बनाने को लेकर बिल्डिंग कमेटी जून 2022 में अनुमति दे चुकी है। सितंबर में पांचवीं मंजिल पर रखी करीब एक लाख पुस्तकों को ओल्ड कोरेस्पोंडेंट बिल्डिंग में ट्रांसफर कर दिया है। जल्द इसे बनाने के लिए टेंडर निकाला जाएगा।
प्रयोगशाला से इतिहास संग्रहित करने में मिलेगी मदद :
लैब से पंजाब क्षेत्र के इतिहास को संग्रहित करने में मदद मिल पाएगी, जिसमें फारसी भाषा में लिखी 800 साल पुरानी हस्तलिपियां, वेद, संविधान की कॉपी आदि शामिल हैं। इसके अलावा प्रदर्शनी केंद्र में इन हस्तलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिससे छात्र इतिहास के बारे में बेहतर समझ सकेंगे। रिकॉर्डिंग रूम में पुरानी पुस्तकों, इतिहास से संबंधित लोगों के अकाउंट को रिकॉर्ड किया जाएगा। रिपॉजिटरी में पुस्तकों, हस्त लिपियों को स्टोर किया जाएगा।
प्रयोगशाला से कर पाएंगे डिप्लोमा कोर्स शुरू :
एसी जोशी पुस्तकालय में 1492 हस्त लिपियां और 40 हजार दुर्लभ किताबें है। प्रयोगशाला से महत्वपूर्ण हस्त लिपियों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि लैब बनने से वह डिप्लोमा इन आर्काइव एंड रिकॉर्ड मैनेजमेंट शुरू कर पाएंगे। अभी देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में यह कोर्स उपलब्ध है और कुछ जगह इसमें स्नातकोत्तर है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आर्काइव्ज एंड रिकॉर्ड मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा शुरू किया है, बीएचयू में स्नातकोत्तर उपलब्ध है।