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Chandigarh: एआई सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजेगा पीयू, देश में बनने हैं तीन सेंटर

Mon, 01 Jan 2024 03:01 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

सीओई कृषि, स्वास्थ्य और स्मार्ट सिटी इन तीन क्षेत्रों पर काम करेंगे और बड़े स्तर पर लोगों को लाभ देने वाले समाधानों पर काम करेंगे। पीयू इन तीन क्षेत्रों में से बड़ी समस्या और उसके हल के तकनीकी समाधान और बजट बनाकर भेजना होगा।  
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पंजाब विश्वविद्यालय। - फोटो : फाइल फोटो।
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विस्तार
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देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विकास और तकनीकी समाधान निकालने के लिए 990 करोड़ के बजट पर तीन उच्च शैक्षणिक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाए जाने हैं। पंजाब विश्वविद्यालय ने फैसला किया है कि कैंपस में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाए जाने के लिए वह शिक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजेंगे।

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देश के सत्र 2023-24 के बजट में 'मेक एआई इन इंडिया, मेक एआई वर्क फॉर इंडिया' के विजन साकार करने के लिए तीन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाने का प्रावधान किया था। इसमें पांच सालों में तीनों सेंटर के लिए 990 करोड़ का बजट निर्धारित है। सेंटर बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों से प्रस्ताव मांगे हैं। 

नवंबर में मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी की जिसमें कॉल फॉर प्रपोजल और सेंटर बनाने के लिए चयन प्रक्रिया शामिल है। पीयू के अधिकारियों का दावा है कि वह आवेदन के लिए मंत्रालय की शर्तों पर खरा उतरते हैं। प्रस्ताव उन संस्थानों से मांगे गए हैं जिनकी 2023-24 में नीरफ रैंकिंग की ओवर ऑल कैटेगरी में 100 के अंदर है। मंत्रालय द्वारा पहले 15 संस्थानों को चुना जाएगा और उनमें से तीन को सेंटर बनाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।
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कृषि, स्वास्थ्य और स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में करेंगे काम
सीओई कृषि, स्वास्थ्य और स्मार्ट सिटी इन तीन क्षेत्रों पर काम करेंगे और बड़े स्तर पर लोगों को लाभ देने वाले समाधानों पर काम करेंगे। पीयू इन तीन क्षेत्रों में से बड़ी समस्या और उसके हल के तकनीकी समाधान और बजट बनाकर भेजना होगा। इससे पूर्व 2014 में डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) बनाने के लिए पीयू का मंजूरी मिली थी जिसके अंतर्गत तीन लैब में विभिन्न प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पूरे देश में 22 उच्च शैक्षणिक संस्थानों में डीआईसी हैं। सीओई में स्टार्टअप, सरकार, उद्योग विशेषज्ञ और शिक्षक मिलकर काम करेंगे। इसमें गठित होने वाली प्रोजेक्ट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग कमेटी में शिक्षक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षक आदि शामिल रहेंगे जो विभिन्न प्रोजेक्ट के विकास की निगरानी करेंगे।

इन सूचकों पर आंकी जाएगी प्रोजेक्ट की सफलता
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी कॉल फॉर प्रपोजल में प्रोजेक्ट की सफलता के लिए कुछ सूचकों की जानकारी दी गई है। इनमें कृषि के क्षेत्र में मोटे अनाज की पैदावार में बढ़ोतरी, फसल में बीमारी लग जाने से होने वाले वेस्ट में कमी, फसल के भंडारण और परिवहन में बेहतरी और फसल में पानी की उपयोगिता में इजाफा। स्वास्थ्य में स्वस्थ बच्चों के जन्म में बढ़ोतरी, ग्रामीण बच्चों में कुपोषण कम करना और ब्रेस्ट कैंसर का शीघ्र पता लगाना आदि। सस्टेनेबल सिटीज में वायु और जल प्रदूषण कम करना, सीवेज सिस्टम और कचरा निस्तारण को बेहतर करना और ऊर्जा की खपत कम करना आदि।

केंद्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाए जाने हैं। इसके लिए पीयू शिक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा। पीयू का प्रपोजल चयनित होने से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तकनीकी विकास करने में सहायता मिलेगी। - प्रो. रेणु विग, पीयू कुलपति

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