याचिका के माध्यम से उन्होंने मांग की थी कि डेरा प्रमुख की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की जाए, जिससे कि हरियाणा के सभी जिलों में कानून व्यवस्था बनी रहे। इस पर आठ जनवरी को कोर्ट ने सुनारिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश होने के निर्देश दिए थे।
डेरा प्रमुख ने तीन लोगों के साथ मिलकर रची थी हत्या की साजिश
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर किशन लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह के साथ मिलकर साजिश रचकर पत्रकार छत्रपति की हत्या कराने का आरोप है। आरोप है कि बाइक पर आए कुलदीप सिंह ने गोली मारकर छत्रपति की हत्या कर दी थी, उसके साथ निर्मल सिंह भी था। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र 'पूरा सच' में इस संबंध में बेनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था और पूरे मामले का खुलासा किया था।
इस मामले में 2003 में एफआईआर दर्ज हुई थी और 2006 में मामला सीबीआई के सुपुर्द किया गया था। इन साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में ही राम रहीम सुनारिया जेल में 20 वर्ष कैद की सजा भुगत रहा है।
अंशुल छत्रपति ने बताया कि साल वर्ष 2000 में सिरसा में उनके पिता रामचंद्र छत्रपति ने वकालत छोड़कर 'पूरा सच' नाम से अखबार शुरू किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी हाथ लगी, जिसमें डेरे में साध्वियों के यौन शोषण की बात थी। उन्होंने उस चिट्ठी को अपने अखबार में छाप दिया, जिसके बाद उनको जान से मारने की धमकियां दी जाने लगी।
अंशुल छत्रपति ने बताया कि जिस दिन उनके पिता की हत्या हुई, उस दिन करवाचौथ था। उन्होंने बताया कि उनके पिता अकसर अखबार का काम करने के बाद घर लेट आते थे। लेकिन उस दिन करवाचौथ का दिन होने के कारण वह भी जल्दी घर आ गए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता मोटर साइकिल आंगन में खड़ी करके अंदर आए ही थे कि किसी ने आवाज देकर उन्हें बाहर आने को कहा।
जैसे ही वो बाहर गए, अचनाक स्कूटर पर आए दो नौजवानों में से एक ने उनके पिता पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। उन्होंने बताया कि इससे पहले हम तीनों बहन भाई यह समझ पाते कि हुआ क्या है, वो हत्यारे भाग निकलते थे। जिसके बाद तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें दिल्ली अपोलो अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान हालत उनकी मौत हो गई।