चंडीगढ़ में 18 जनवरी को मेयर का चुनाव होना है। इसमें भाजपा के पार्षद का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि भाजपा में गुटबाजी को देखते हुए इस चुनाव में पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है। भाजपा के अंदर चर्चा है कि यदि मन मुताबिक पार्षद को मेयर नहीं बनाया गया तो क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने इसे विपक्ष की चाल बताया है। हारे हुए विपक्ष की यह अफवाह मात्र है। इससे पार्टी कोई नुकसान नहीं होने वाला है।
पार्टी का जो फैसला होगा, वही सर्वमान्य होगा। भारतीय जनता पार्टी भले ही मेयर चुनाव को लेकर अपने जीत की दलीलें दे रही हो, लेकिन मेयर चुनाव में टिकट की घोषणा होने के बाद पार्टी में आपसी खींचतान के आसार दिखाई दे रहे हैं। इससे भाजपा को अपनों से ही क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। यही डर विरोधियों को भी सता रहा है कि उनके पास केवल एक ही प्रत्याशी है, अगर वो भी निकल गया तो फजीहत होना निश्चित है। इसी के चलते दोनों ही अपनी कमजोर कड़ियां सुधारने में लगे हैं।
निगम में यह है पार्षदों की स्थिति
पिछले मेयर चुनाव के दौरान जिस प्रकार भाजपा में प्रत्याशी चयन से लेकर चुनाव तक में गुटबाजी देखने को मिली थी, विपक्ष इस बार भी उसी उम्मीद को लेकर आशाओं का दम भर रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा में 4 पार्षद मेयर के लिए योग्य हैं। बताया जाता है कि इनमें से 3 पार्षद इस दौड़ में शामिल हैं, जबकि 1 पार्षद एक्टिव नहीं होने के चलते इसे दौड़ से बाहर माना जा रहा है।
यह है निगम की स्थिति
निगर निगम में इस समय कुल 35 पार्षद हैं। इसमें 26 निर्वाचित पार्षद हैं। 9 मनोनीत पार्षद हैं। इसमें भाजपा के 20, कांग्रेस 4, अकाली 1 और निर्दलीय 1 पार्षद शामिल हैं। भाजपा के पास आरक्षित श्रेणी में 4 और कांग्रेस के पास केवल 1 पार्षद है। इस बार मेयर के लिए आरक्षित सीट है। इसलिए भाजपा के चार और कांग्रेस के एक पार्षद ही मेयर के लिए योग्य हैं।
भाजपा में तीन नामों पर मंथन, अधिवेशन में लगेगी मुहर
नगर निगम चुनाव की तिथि नजदीक आते ही प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के नाम पर चर्चा आम हो गई है। भाजपा ने मेयर के लिए तीन पार्षदों के नाम की फाइल तैयार कर ली है। शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी की होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसे प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो पहले आने वाले प्रमुख रूप से तीन नामों पर चर्चा चल रही है। भाजपा के दो दिन तक चलने वाले अधिवेशन में इन तीनों नामों में से किसी एक नाम पर मुहर लग जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में शुक्रवार और शनिवार को होनी है। प्रदेश भाजपा के बड़े नेता अपने चहेतों की दावेदारी को पुख्ता करने के बीते कई दिनों से दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ऐसे प्रत्याशी को टिकट देगी, जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ सके। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में होने वाली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मेयर प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगा दी जाएगी।
इस बार शहर में मेयर की सीट आरक्षित है। इसको देखते हुए भाजपा में चार पार्षद मेयर के लिए दावेदार बताये जा रहे हैं। भाजपा में इस समय राजेश कालिया, भरत कुमार, सतीश कुमार कैंथ के नाम पर चर्चा चल रही है, जबकि फर्मिला को भी मेयर की दौड़ में माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि आलाकमान दो दिन के मंथन के बाद मेयर का नाम फाइल कर देगा। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष द्वारा ही शहर में नाम की घोषणा की जाएगी।
कांग्रेस की चार सीटें, फिर भी मेयर की दावेदारी
कांग्रेस का एक और भाजपा से चार पार्षद मेयर पद के दावेदार हैं। खास बात यह कि कांग्रेस बिना दम के ही मेयर की दावेदारी कर रही है। नगर निगम में कांग्रेस के मात्र चार पार्षद हैं। मेयर पद हासिल करने के लिए कम से कम 14 पार्षदों का वोट होना जरूरी है। भाजपा के 20 पार्षद हैं। एक अकाली दल और एक निर्दलीय पार्षद हैं। चार पार्षद वाली कांग्रेस पार्टी मेयर पद हासिल करने के लिए 10 वोट कहां से आएगा तो कांग्रेसी कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।
कांग्रेस में एक मात्र अनुसूचित जाति की श्रेणी में पार्षद शीला देवी हैं। शीला देवी शांत होकर काम करती हैं। सदन की बैठक में भी वे शांत रहकर अपनी बात रखती हैं। कांग्रेस पार्टी भाजपा पर नजर बनाए हुए है। भाजपा में चार दावेदार हैं। इन चारों में से पार्टी किसी एक को मेयर पद का उम्मीदवार बनाएगी। इसी बात पर कांग्रेस का ध्यान है कि कहीं बागी होकर भाजपा का कोई भी पार्षद आगे आया तो समर्थन का लेनदेन हो सकता है।
राजनीति में कभी भी संभावना बन जाती है। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है। सोच समझकर काम कर रहे हैं। कई चीजें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।
- प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी चंडीगढ़