इसके बाद याचिकाकर्ता ने निगम आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना को लेकर याचिका दायर कर दी थी। 09 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम आयुक्त को अप्रैल के अंत तक हर हाल में 5 लाख रुपये की जुर्माना राशि जमा करवाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि राशि नहीं जमा करवाई गई तो जुर्माना और बढ़ा दिया जाएगा।
पिछली सुनवाई पर बताया गया था कि अभी तक जुर्माने की राशि अदा नहीं की गई है। हाईकोर्ट में केवल 5 लाख के ड्राफ्ट की कॉपी पेश की गई जिस पर हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर सोमवार को उन्हें हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश जारी कर दिए थे। बाद में सरकारी वकील ने आयुक्त को पेश होने के लिए समय दिए जाने की अपील की।
जब तक निगम आयुक्त पहुंचे तब तक अदालत का समय समाप्त हो गया था। लिहाजा हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को हर हाल में सोमवार को हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। सोमवार को वह सुबह ही कोर्ट में पहुंच गए और हाईकोर्ट में उन्हें पूरा दिन बैठाए रखा गया, जिसके बाद शाम 4 बजे उन्हें सुना गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह राशि के भुगतान के पक्ष में थे और उन्होंने अपने वकील को बहस के लिए नहीं कहा था। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए इस बारे में हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।