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6 साल बाद मासूमों को मिला इंसाफ, 'अपना घर' केस में 3 को हुई सजा, जानिए पूरा मामला

Sat, 28 Apr 2018 09:50 AM IST
सर्वेश कुमार, अमर उजाला, पंचकूला
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अपना घर जसवंती देवी
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कहने को 'अपना घर' था, पर वे वहां रहने वाली बच्चियों का भक्षण करते थे। आखिरकार 'पाप' का घड़ा भरा और मासूमों को इंसाफ मिल गया। मामला है रोहतक के बहुचर्चित ‘अपना घर’ में यौन शोषण का। 6 साल बाद शुक्रवार को पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई अदालत ने अपना घर (अनाथालय) की संचालिका जसवंती देवी समेत नौ आरोपियों को सजा सुनाई।
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कोर्ट ने संचालिका जसवंती देवी, ड्राइवर सतीश और दामाद जय भगवान को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जसवंती के भाई जसवंत को 7 साल की सजा सुनाई गई है। वहीं 5 अन्य दोषी जसवंती की बेटी सुषमा उर्फ सिमी, चचेरी बहन शीला, सहेली रोशनी, कर्मचारी रामप्रकाश सैनी, काउंसलर वीना की सजा अंडरगोन कर दी गई है। 18 अप्रैल को सभी को कोर्ट ने दोषी करार दिया था।

आरोपियों में संचालिका जसवंती देवी का भाई जसवंत, बहन शीला, काउंसलर वीणा, ड्राइवर सतीश,  कर्मचारी रामप्रकाश सैनी, जय भगवान, सिम्मी और रोशनी शामिल हैं। एक आरोपी अंगरेज कौर हुड्डा (तत्कालीन बाल विकास परियोजना अधिकारी) को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में सभी आरोपियों सहित उनके नजदीकी और रिश्तेदार भी मौजूद थे।
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मई 2012 में बाल संरक्षण आयोग ने मारा था छापा

अपना घर जसवंती देवी
रोहतक स्थित अनाथालय अपना घर में 08 मई 2012 को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने छापामारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान अपना घर से तीन लड़कियों के लापता होने की जानकारी टीम को मिली। बाद में तीनों लड़कियां दिल्ली से बरामद हुईं। अपना घर में हुई छापेमारी के दौरान आरोपियों की मिलीभगत से अनाथालय में रहने वाली लड़कियों को देह व्यापार में ढकेलने, उनके यौन शोषण, मारपीट और मानव तस्करी का खुलासा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने अनाथालय की संचालिका जसवंती देवी सहित 10 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इन धाराओं के तहत दर्ज किया गया मामला
अपना घर की संचालिका जसवंती देवी, भाई जसवंत, बहन शीला, काउंसलर वीणा, ड्राइवर सतीश,  कर्मी राम प्रकाश सैनी, जयभगवान,  सिम्मी, रोशनी, अंगरेज कौर हुड्डा के खिलाफ आईपीसी की धारा 109, 120बी, 323, 325, 354, 374, 376, 420, 468, 471 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।  

मामले में 147 गवाहों के दर्ज हुए बयान
इस मामले में अब तक सीबीआई की ओर से 121 गवाहों समेत बचाव पक्ष के 26 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। इस मामले में पिछले सप्ताह की अंतिम बहस पूरा होने के बाद पिछली सुनवाई पर भी फैसला सुनाया जाना था, जिसे बाद में बुधवार के लिए नियत कर दिया गया।

पांच आरोपी थे जमानत पर
एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला जून 2012 में सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया था। फिलहाल सिम्मी, वीणा, अंगरेज कौर, आरके सैनी और रोशनी जमानत पर थे जबकि अन्य पांच आरोपी जेल में हैं।


 
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इस तरह की गई थी मामले की जांच

अपना घर जसवंती देवी
मामले की जांच जून 2012 में सीबीआई को सौंप दी गई थी, जबकि अगस्त में इस मामले में पेश किए गए चालान में अपना घर की संचालिका जसवंती देवी को मामले का मुख्य आरेापी बनाया गया। आरोपियों को जब अदालत ने दोषी करार दिया तो उनके रिश्तेदारों और आरोपियों की आंखों से आंसू छलक पड़े।

इस मामले में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में फरवरी, 2018 में अंतिम बहस शुरू हुई थी। पीड़ितों की ओर से दिए बयान और आरोपियों की पहचान के बाद आरोपी सतीश और जय भगवान के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की धारा जोड़ी गई थी।

सुबूतों के आभाव में अंगरेज कौर हुईं बरी
बचाव पक्ष के वकील एसपीएस परमार और अभिषेक सिंह राणा ने बताया कि इस मामले के नौ आरोपियों को दोषी करार दिया गया है जबकि अंगरेज कौर हुड्डा जो तत्कालीन सीडीपीओ थीं, उन्हें सुबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया है। उन पर लड़कियों के साथ अनाथालय में मारपीट का आरोप था, लेकिन यह आरोप साबित नहीं किया जा सका।

राम रहीम को सजा सुनने वाले जज ने सुनाई सजा
रोहतक के अपना घर में यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी के अलावा शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलने वाली बेटियों को आखिरकार न्याय मिल ही गया। न्याय देने वाले वही जगदीप सिंह हैं, जिन्होंने 25 अगस्त, 2017 को साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था।

 
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