हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार के समय गठित अंबाला और पंचकूला नगर निगम को भंग करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही पूर्व सरकार में बने पांच अन्य व भाजपा सरकार में बने एक नगर निगम के दायरे में शामिल गांव भी बाहर किए जाएंगे।
सीएम मनोहर लाल के हिमाचल प्रदेश से लौटने के बाद बुधवार देर रात हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, बैठक में खेल मंत्री अनिल विज शामिल नहीं थे, लेकिन वह पहले से ही इसके पक्ष में हैं। कैबिनेट की सहमति के बाद अब अगली मंत्रिमंडल बैठक में इसे बतौर एजेंडा लाकर पारित कर दिया जाएगा। अंबाला व पंचकूला नगर निगमों को भंग कर दिया जाएगा। इसके बाद अंबाला छावनी व अंबाला शहर नगर परिषदें बनाई जाएंगी।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज काफी समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं। पंचकूला नगर निगम को भंग कर कालका व पिंजौर नगर परिषद बनेंगी, जबकि इसमें शामिल गांव पंचायतों में फिर से समायोजित किए जाएंगे। पंचकूला के शहरी क्षेत्र को ही नगर निगम बनाने की अधिसूचना दोबारा शामिल होगी। इसकी मांग कालका की भाजपा विधायक लतिका शर्मा लगातार कर रही थीं।
पंचकूला के भाजपा ज्ञानचंद गुप्ता भी नगर निगम में शहरी क्षेत्र को ही शामिल करने के हक में हैं। विज ने अंबाला के गांवों का विकास न होने व लतिका ने कालका व पिंजौर को नगर निगम के बजट का लाभ न मिलने पर इसे भंग करने की मुहिम शुरू की थी। पूर्व हुड्डा सरकार ने पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक व हिसार नगर निगम बनाए थे, जबकि भाजपा सरकार ने सोनीपत को नगर निगम बनाया है। इन निगमों की परिधि में शामिल ढाई सौ से अधिक गांवों को बाहर किया जाएगा। ये गांव दोबारा से पंचायतों में जाएंगे। इसके पीछे बड़ा कारण गांवों के विकास पर नगर निगमों का ध्यान न देना है।