ईशापुर खेड़ी गांव की पंचायत ने लड़कियों के लिए एक तुगलकी फरमान सुनाया है। सरपंच का कहना है कि गांव की कोई भी लड़की न तो जींस पहनेगी, न अपने पास मोबाइल रखेगी। पंचायत ने गांव में मुनादी भी कराई है। सरपंच खुद बैठक करके फैसले पर अमल कराने के लिए लोगों से कह रहे हैं। पंचायत का तर्क है कि कुछ दिनों पहले गांव की कुछ लड़कियां दूसरे लड़कों के साथ चली गईं थीं। इसी के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
सरपंच का कहना है कि गांव में दो बार ऐसा हुआ है कि लड़कियां किसी के साथ चली गईं। इससे पंचायत की बदनामी हुई। इसके लिए पंचायत ने मोबाइल को जिम्मेदार माना है। साथ ही लड़कियों के पहनावे को भी पंचायत जिम्मेदार मानती है। इसीलिए पंचायत ने कई दिन पहले यह फरमान जारी किया कि अब गांव में कोई भी लड़की मोबाइल नहीं रखेगी और जींस नहीं पहनेगी। इस संबंध में गांव के चौकीदार से मुनादी कराई गई। फरमान पर अमल कराने के लिए सरपंच प्रेम सिंह लोगों के बीच जाकर बैठकें कर रहे हैं। सरपंच का कहना है कि फैसले को गांव का समर्थन मिल रहा है। गांव के अधिकतर लोग फैसले की सराहना कर रहे हैं।
सरपंच का तर्क
प्रेम सिंह, सरपंच, गांव ईशापुर खेड़ी का कहना है कि, कई दिनों पहले गांव से कई लड़कियां अन्य गांवों के युवकों के साथ चली गईं। इससे पंचायत की बदनामी हुई। इसकी वजह जानी गई तो सामने आया कि वह लड़कियां मोबाइल रखती थीं और लड़कों से बातें करती थीं। उनका पहनावा अलग था। इस कारण पंचायत ने फैसला लिया है कि लड़कियों को मोबाइल नहीं रखने दिया जाए और उनको जींस पहनने से रोका जाए।