समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट
समझौता ब्लास्ट में असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी के खिलाफ आईपीसी की धारा- 120 बी, 302, 307, 324, 326, 124-ए, 430, 440 के तहत केस दर्ज किए गए थे। रेलवे एक्ट के तहत आईपीसी की धारा-150, 151, 152 के तहत दर्ज किया गया था। इसके अलावा अन ला फुल एक्टिविटी के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके अलवा पब्लिक प्रॉपर्टी को डैमेज करने की धाराओं में भी केस दर्ज किया गया था।
यह था मामला
भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को पानीपत जिले के चांदनी बाग थाने के सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नजदीक विस्फोट हुआ था। ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी और 12 लोग घायल हुए थे। मरने वालों में 16 बच्चे और चार रेलवे कर्मचारी भी शामिल थे। इनमें अधिकांश पाकिस्तानी थे।
आरोपियों के खिलाफ नहीं मिले सबूत: एडवोकेट मुकेश गर्ग
समझौता ब्लास्ट में बचाव पक्ष के वकील मुकेश गर्ग ने बताया कि किसी भी आरोपी के खिलाफ सबूत नहीं मिले। एनआईए कोई पुख्ता सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर पाई। वह कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। गौरतलब है कि मामले के मुख्य आरोपी असीमानंद जमानत पर थे। वहीं, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी अभी जेल में हैं। इनका रिलीविंग ऑर्डर कोर्ट की ओर से जेल वॉर्डन को भेजा जाएगा। इसके बाद तीनों रिहा होंगे।