लगभग 300 साल पुराने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हस्त लिखित पावन स्वरूप को लाहौर के एक संग्रहालय में दर्शनों के लिए रखे जाने पर पाकिस्तानी सिखों ने आपत्ति जताई है। पीएसजीपीसी ने इस पावन स्वरूप को किसी गुरुद्वारा साहिबान में सुशोभित करने की मांग की है। इस पावन स्वरूप पर कोई तारीख तो अंकित नहीं है लेकिन इसकी लिखाई और स्याही से अनुमान लगाया जाता है कि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है।
इस हस्त लिखित पावन स्वरूप की पवित्र बीड़ देश विभाजन के दौरान पलायन करने वाले सिख लाहौर संग्रहालय में भेंट कर गए थे। तभी से पावन स्वरूप को यहां संभाला गया था। बुधवार को इसे दर्शनों के लिए रखा गया। एक लिखित स्वरूप सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन की पहली मंजिल में भी संगत के दर्शनों के लिए सुशोभित है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष बिशन सिंह ने कहा कि इस पावन स्वरूप को पाकिस्तान स्थित किसी भी एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में सुशोभित किया जाना चाहिए। इसे किसी अन्य किताब की तरह एक कोठरी में नहीं रखा जा सकता।
पावन स्वरूप गुरुद्वारा साहिबान में ही सुशोभित होते हैं। बिशन सिंह के अनुसार, वह इस संवेदनशील मुद्दे पर पीएसजीपीसी की आगामी बैठक में चर्चा करने की मांग करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि संग्रहालय को इस दुर्लभ ग्रंथ को गुरुद्वारे में देना चाहिए और सिखों के एक समूह को पवित्र ग्रंथ की सेवा संभाल के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, कई हस्तलिखित पावन स्वरूप मुल्तान संग्रहालय व दयाल सिंह ट्रस्ट लाइब्रेरी में संरक्षित किए हुए हैं। स्थानीय सिख इस प्राचीन पावन स्वरूप को लाहौर स्थित गुरु द्वारा डेरा साहिब में सुशोभित करने की मांग कर रहे हैं।